अलग समयसीमा नुसार कीमतों की दिशा

ट्रेंड यह एक विविधता से भरा हुआ और एक लचीली संकल्पना है जो ट्रेडर्स के जरूरतों के से हिसाब से बदली जा सकता है | ट्रेंड की अलग परिभाषा यह भी है की “कीमतों की दिशा जो इंडीकेटर्स के द्वारा पहचानी जा सके” | हर एक ट्रेडर अपने जरुरत , अपनी समज और अपने जोखिम अनुसार ट्रेंड का उपयोग करता है | जब कीमते इंडीकेटर्स के अनुसार उचित दिशा में गतिनुसार प्रस्थान करने लगती है तो उसे “त्रेन्डिंग” कहा जाता है |   और जानने के लिए पढिये :  ट्रेंड को कैसे बनाये अपना मित्र ?

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ट्रेंड की विशेषताए

हर एक स्टॉक या कमोडिटी का अपनी खुद की त्रेन्डिंग विशेषताए होती है | सी लिए एक सेक्टर्स के सभी स्टॉक अलग अलग ट्रेंड और ट्रेड होते है | कुछ स्टॉक दूसरो से ज्यादा और अच्छे तरीके से ट्रेंड होते है और वो ट्रेडर्स के पसंदीदा होता है तो कुछ स्टॉक इतने ढीले होते है की उनको टेक्निकल एनालिसिस के मदत से न ट्रेड किया जा सकता और ना उनमे निवेशित हो सकते है | स्टॉक की वोलाटिलिटी और मार्केट का उसमे दिलचस्पी यह भी प्रात्यक्षिक कारण होते है | कुछ स्टॉक ट्रेंड को उम्मीद से ज्यादा वक्त तक पालन करते है तो कुछ वक्त से पहले ही घूम जाते है | यह सब एक ट्रेडर्स चार्ट देखकर बता सकता है , यही कारण है की एक ट्रेडर्स को हमेशा ट्रेड या निवेश करने से पहले स्टॉक का टेक्निकल चार्ट जाचना चाहिए नहीं तो आप एक गलत ट्रेड में या भी मृत निवेश में फ़स सकते है | बहुत से नए ट्रेडर्स और निवेशको के साथ अक्सर यही होता है |   और जानने के लिए पढिये : टेक्निकल एनालिसिस काम करता है या नहीं ?   आप अगर एक चार्ट पर दस अलग ट्रेडर्स की राय मांगेंगे तो आपको सब अलग अलग राय मिलेंगी क्योकि हर एक व्यावसायिक ट्रेडर्स का अपना एक अंदाज और जोखिम होता है और वो उसी हिसाब से अपनी राय रखता है | इसी लिए एक ही चार्ट पर आपको दस अलग सुजाव और ट्रेड मिलेंगे | मेरे अनुभव से कमोडिटी और करेंसी वैश्विक होए के कारण ज्यादा ट्रेंड होती है और उसकी तुलना में स्टॉक में लोकल फैक्टर्स ही होते है और वो तुलनात्मक कम ट्रेंड पालन करते है | क्योकि कमोडिटी और करेंसी अर्थव्यवस्था से सीधे जुडी होती है और स्टॉक्स का तुलनात्मक कम संबंध होता है | एक अनुभवी और चालक ट्रेडर्स हमेशा अपने स्टॉक ये कमोडिटी के साथ योग्य समय बिताता है और जाचता है की कम स्टॉक ट्रेंड होता है और कब नहीं | इससे उसे ट्रेडिंग की आईडिया आ जाती है | image_thumb%25255B1%25255D अलग समयसीमा नुसार कीमतों की दिशा

ट्रेंड की पहचान

कोई भी स्टॉक या कमोडिटी हर समय ट्रेंड में नहीं रहते | अच्छे से अच्छा स्टॉक या कमोडिटी कुछ समय साइड वेज़ ट्रेंड में बिताता है | साइड वेज़ ट्रेंड को ही कंसोलिडेशन कहा जाता है | कंसोलिडेशन में कीमतों में ज्यादा उतार और चढाव न होकर वो एक सीमा या फिर लाइन में घुमती रहती है | यह परिस्थितिया ट्रेडिंग करने के लायक नहीं होती और ये आने वाले अपट्रेंड या फिर डाउन ट्रेंड का संकेत होता है | एक अनुभवी ट्रेडर या इन्वेस्टर औरो से पहले इस समय का उपयोग स्टॉक का संचय या फिर निकने के लिए करता है |   और जानने के लिए पढिये : टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग निवेशक करे या ना करे ?   आप चार्ट की समय सीमा नुसार उसका उपयोग कीमतों की दिशा योग्य तरीके से पहचाने के लिए कर सकते है | उदारण स्वरुप अगर स्टॉक दिवसीय चार्ट पर कंसोलिडेशन दिखा रहा है तो निवेशक साप्ताहिक या मासिक चार्ट देख कर ये पता कर सकता है की ये कंसोलिडेशन लम्बे समय के अपट्रेंड या फिर डाउन ट्रेंड का भाग है | जब कीमते मुख्य औसत को ऊपर के तरफ पर करती है तो उसे बुलिश ट्रेंड कहते है और जब वो औसत के निचे टूट जाती है तो उसे बीयरिश ब्रेकडाउन कहते है | image_thumb%25255B2%25255D अलग समयसीमा नुसार कीमतों की दिशा

ट्रेंड और समय सीमा

चार्ट की समय सीमा बदलने पर कीमतों ट्रेंड का परिपेक्ष्य भी बदल जाता है | उदारण स्वरुप दिवसीय चार्ट पर अपट्रेंड में दिखनेवाला स्टॉक मासिक चार्ट पर डाउन ट्रेंड में हो सकता है | मुख्य ट्रेंड हमेशा अंतर्निहित अप्रधान ट्रेंड पर असर डालता है | इसी लिए एक खोजी ट्रेडर हमेशा मुनाफे वाले ट्रेड में एक अच्छा प्रवेश और निर्गम पता है | इसी लिए एक ट्रेडर्स को अपने जोखिम और समयानुसार चार्ट की समय सीमा चुननी चाहिए और उसके अनुसार ही ट्रेडिंग करनी चाहिये | एक शोर्ट टर्म ट्रेडर्स अगर साप्ताहिक या मासिक चार्ट देखकर ट्रेडिंग के फैसले लेता है तो वो बहुत बार नुकसान से गुजरेगा और एक निवेशक अगर तासिक या दैनिक चार्ट देखकर निवेश का फैसला लेता है तो वो एक बुरे निवेश में फ़स सकता है | इसी लिए आप ट्रेंड को उसकी समय सीमा बिना बताये समजा या फिर उपयोग में नहीं ला सकते |   और जानने के लिए पढिये : स्टॉक मार्केट के चार्ट के प्रकार   अगर आप ऐसा करते है तो वो टेक्निकल दृष्टिकोण से पूरी तरह गलत होगा | यही मार्केट की जटिलताए है जो एक सामान्य ट्रेडर्स को समज नहीं आती है | मार्केट हमेशा एक गतिशील और बदलाव युक्त इकाई है | तो अगली बार से आप अगर ट्रेंड को समजा रहे हो तो वो किस समय सीमा का है ये बताने से ना चुके |

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