टेक्नीकल एनालिसिस टुटोरिअल : चार्टिंग स्टाइल्स और उनके प्रैक्टिकल उपयोग

इस आर्टिकल में हम अलग अलग प्रकार के चार्टिंग स्टाइल या प्रकार की बेसिक जानकारी लेंगे और उनके उपयोग सीखेंगे | यह चार्ट के प्रकार व्यावसायिक ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स हर रोज उपयोग में लाते है |

 

सामान्यतः चार मुख्य चार्ट के प्रकार है, जो ज्यादातर ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स मार्केट को ट्रैक और मार्केट का अभ्यास करने के लिए उपयोग में लाते है | और वो चार्ट प्रकार है , लाइन चार्ट, बार चार्ट, कैंडलस्टिक चार्ट और पॉइंट एंड फिगर चार्ट | और कभी कभी इस्तेमाल में आने वाले अन्य स्पेशल टाइप के चार्ट प्रकार है : वॉल्यूम कैंडल चार्ट, बेसलाइन डेल्टा चार्ट, स्केटरप्लाट चार्ट, कलर्ड स्टेप चार्ट, हैकिनआशी चार्ट, कागी चार्ट, थ्री लाइन ब्रेक चार्ट, रेंज बार चार्ट और रेनको चार्ट, इत्यादी |

 

अब हम आगे इन सब चार्ट प्रकार को विस्तार में देखेंगे और उनका प्रैक्टिकल ट्रेडिंग में उपयोग सीखेंगे |

लाइन चार्ट : लाइन चार्ट, यह चार्ट का प्रकार है जिसमे चार्ट पर डेटा, कीमतों की बिंदुओं को जिन्हें “मार्कर्स” कहा जाता है उन्हें लाइन से जोड़कर प्रदर्शित किया जाता है | लाइन चार्ट का उपयोग ज्यादातर, डेटा कैसे टाइम के साथ चेंज हो रहा है उसका अभ्यास करने के लिए किया जाता है | यह चार्ट का सबसे बेसिक प्रकार है और यह अलग अलग क्षेत्रो में निरंतरित उपयोग में लाया जाता है | यह चार्ट, स्केटरप्लाट चार्ट की तरह ही होता है , फर्क इतना है की यहाँ बिंदु को रेखा से जोड़कर डेटा प्रदर्शित किया जाता है | स्टॉक मार्केट में लाइन चार्ट, सामान्यतः क्लोजिंग प्रायसेस को जोड़कर दिखने के लिए किया जाता है | यह चार्ट कीमतों का ट्रेंड सटीकता से दिखाते है मगर कीमतों की वोलाटिलिटी छुपा देते है | इसी वजह से टेक्निकल ट्रेडिंग में इनका उपयोग कम किया जाता है | कुछ लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स इस चार्ट का उपयोग इंडीकेटर्स और ओस्सीलेटर्स के साथ में मार्केट का टॉप और बॉटम धुंडने के लिए बखूबी से करते है |

बार चार्ट : बार चार्ट में एक खडी लाइन का उपरी छोर हाई प्राइस दिखता है तो निचे का छोर लो प्राइस इंडीकेट करता है | क्लोजिंग प्राइस दाईं ओर आलेखित की जाती है तो ओपनिंग प्राइस बाईं तरफ बार पर दिखाई जाती है | कैंडलस्टिक चार्ट की तरह ये चार्ट भी टेक्निकल एनालिसिस में सामान्य चार्टिंग और चार्टिंग पैटर्न्स दिखने के लिए उपयोग में लाये जाते है | इन चार्ट्स को “ओ यच यल सी” या ओपन-हाई-लो-क्लोज चार्ट भी कहा जाता है | पुराने समय में कैंडलस्टिक चार्ट के पॉपुलर होने से पहले अमरीकन ट्रेडर्स में यह चार्ट का प्रकार बहुत पसंद किया जाता था | में भी यही चार्ट प्रकार अपने ट्रेडिंग के लिए उपयोग में लाता हू क्योकि मुझे पर्सनली लगता है की यह चार्ट प्रकार कैंडलस्टिक चार्ट से ज्यादा उपयोगी है और यहाँ आप कीमते कैंडलस्टिक चार्टसे बेहतर या स्पष्ट रूप से देख सकते है | जैसे की ओपनिंग और क्लोजिंग प्राइस का रिलेशन या फिर पिछला क्लोज और वर्तमान के ओपनिंग प्राइस का रिलेशन, यह सब शोर्ट टर्म ट्रेडिंग में बहुत मायने रखता है |

कैंडलस्टिक चार्ट : कैंडलस्टिक चार्ट या जापानीज कैंडलस्टिक चार्ट यह एक वितीय चार्ट का प्रकार है जिसमे प्राइस मूवमेंट को ट्रेडिंग के लिए अच्छी तरह से विश्लेषित कर सकते है | लाइन चार्ट और बार चार्ट का एकत्रित करने से कैंडलस्टिक चार्ट का निर्माण होता है | इसमे हर एक कैंडल में, चार मुख्य तरह के डेटा पॉइंट्स प्रदर्शित करती है, वो है ओपन, क्लोज, हाई और लो | यह सब शोर्ट टर्म में अलग अलग ट्रेडिंग पैटर्न निर्माण करते जो एक ट्रेडर के लिए बहुत उपयोगी होते है | कैंडलस्टिक चार्ट यह सबसे ज्यादा उपयोग में लाये जानेवाला चार्ट का प्रकार है और इसे मुख्यतः इक्विटी और करेंसी मार्केट में सबसे ज्यादा उपयोग में लाया जाता है | कैंडलस्टिक चार्ट प्रथम १८५० में उपयोग में लाया गया था | और इसका निर्माण और उन्नति का श्रेय, प्रसिद्ध चावल व्यापारी “होम्मा” को जाता है जो जापान के “सकाता” नाम के गाव से था |

 

कैंडलस्टिक चार्ट में कैंडल में “बॉडी” जो की क्लोज नुसार हरी या लाल होती है और उपरी और निचली रेखा को “शैडो” या “विक” कहा जाता है | ओपन और क्लोज में की बिचवाली जगह को “रियल बॉडी” कहा जाता है | बॉडी के ऊपर और निचली रेखा वो को “विक या शैडो” कहा जाता है | विक उस समय की हाईएस्ट और लोवेस्ट ट्रेडेड प्राइस को दर्शाता है | जब की बॉडी ओपनिंग और क्लोजिंग प्राइस में की ट्रेडिंग को दर्शाता है |

चार्ट में, सामान्यतः जब स्टॉक ओपन के ऊपर क्लोज होता है तो उसकी बॉडी हरे रंग की दिखाई जाती है और जब स्टॉक ओपन के निचे क्लोज होता है तो उसकी बॉडी लाल रंग की दर्शायी जाती है | कही कही चार्ट में अगर स्टॉक पिछली क्लोज के निचे क्लोज होता है तो उसकी बॉडी लाल रंग की दिखाई जाती है और अगर वो पिछली क्लोज के ऊपर बंद होता है तो उसकी बॉडी हरे रंग की दिखाई जाती है | इस तरह कैंडलस्टिक की बॉडी का कलर उस समय की प्राइस मूवमेंट को सटीकता से दिखता है और कीमतों की दिशा जानने में ट्रेडर की मदत करता है |

पॉइंट एंड फिगर चार्ट : पॉइंट एंड फिगर चार्ट में कीमते चार्ट पर उनकी दिशाओ की नुसार दर्शायी जाती है और इस चार्ट में टाइम को विचार में नहीं लिया जाता | पॉइंट एंड फिगर चार्ट में कीमतों को “X” और “O” की कॉलम में रखकर दिखाया जाता है | इसमें “X” का कॉलम बढ़ती कीमतों को दर्शाता है तो “O” का कॉलम गिरती हुई कीमतों को दर्शाता है | पॉइंट एंड फिगर चार्ट में टाइम फैक्टर नहीं होता है | यह चार्ट जैसे कीमते बढ़ती या घटती है उसकी अनुसार आलेखित होती जाती है | अगर कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं आता है तो चार्ट में भी कोई बदलाव नहीं दिखता है | क्लासिकल ३ बॉक्स रेवेर्सल- पॉइंट एंड फिगर चार्ट में जब तक कीमते ३ बॉक्स को क्रॉस कर कर रेवेर्सल नहीं देती है तब तक नया अलग कॉलम नहीं बनता है | ३ बॉक्स रेवेर्सल मेथड पॉइंट एंड फिगर चार्ट में सबसे पॉपुलर मेथड है | इस प्रकार के चार्ट का उपयोग सिर्फ महत्त्वपूर्ण प्राइस मूवमेंट को पकड़ने के लिए और सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवेल्स को अच्छे से जानने के लिए किया जाता है |

 

दुसरे माइनर चार्ट टाइप्स निम्नतरह है :

 

वॉल्यूम कैंडलस्टिक चार्ट : वॉल्यूम कैंडलस्टिक चार्ट यह चार्ट कैंडलस्टिक चार्ट की तरह ही होता है सिर्फ उसमे एक ही ज्यादा डायमेंशन मिलाया जाता है और वो है वॉल्यूमनुसार कैंडल की चौडाई | अगर उस कैंडल के समय वॉल्यूम ज्यादा होता है तो उस कैंडल की चौडाई ज्यादा रहती है और इसके उलट अगर उस समय वॉल्यूम कम रहता है तो कैंडल की चौडाई पतली रहेगी | चार्ट के निचे वॉल्यूम भी स्तंभों के स्वरुप में दिखाया जाता है | एक लाल वॉल्यूम कैंडलस्टिक मतलब लोअर क्लोज का दिन और एक हरी वॉल्यूम कैंडलस्टिक मतलब हायर क्लोज का दिन | चार्टिस्ट लोग यह चार्ट डेली बेसिस पर प्लाट करके उसमे अलग अलग शेपस और पैटर्न्स धुन्दते है जो कीमतों की दिशा को निर्धारित करते है | ट्रेडर्स को पता होता है की कीमतों की दिशा या फिर ट्रेंड रेवेर्सल में ज्यादा दम रहेगा जब उसको वॉल्यूम का साथ मिलेगा इसी लिए वॉल्यूम कैंडलस्टिक चार्ट का उपयोग किया जाता है |

 

बेसलाइन डेल्टा चार्ट : बेसलाइन डेल्टा चार्ट में कीमतों को लाइन चार्ट की तरह दर्शाया जाता है जो एक बेस डॉटेड लाइन के इर्दगिर्द घुमती रहती है | बेसलाइन के ऊपर के भाग को हरे रंग का दिखाया जाता है और निचे के भाग को लाल रंग का दिखाया जाता है | बेसलाइन डेल्टा चार्ट में लेफ्ट साइड को मेजर क्लोसिग वैल्यू लाइन शुरू होती है | यह चार्टिंग स्टाइल बेस लाइन से कीमतों की पॉजिटिव और नेगेटिव साइड पर दुरी नापती है | यह चार्ट ज्यादातर इंट्रा डे चार्ट में तौर पर इस्तेमाल किया जिसमे लेफ्ट साइड को ओपनिंग प्राइस शुरू होती है और राईट साइड को दिनभर का कीमतों का बाजार में हालचाल दिखता जाता है |

 

 

स्कैटर प्लोट चार्ट : स्कैटर प्लोट चार्ट में डेटा पॉइंट्स एक क्षैतिज और लम्बरूप अक्ष पर आलेखित किये जाते है | स्कैटर प्लोट चार्ट को स्टेटिस्टिक्स में अनन्य साधारण महत्त्व है क्योकि यह कीमतों का ट्रेंड से सह संबंध दर्शाता है | अगर कीमतों का ट्रेंड से कोई संबंध नहीं है तो डेटा पॉइंट्स अक्ष पर इधर उधर फैले हुए दिखाते है | अगर कीमतों का ट्रेंड से गहेरा संबंध है तो डेटा पॉइंट्स ट्रेंड लाइन से सटे हुए नजर आते है | इसी वजह से यह चार्ट, एक बेहतर डेटा, कीमते और ट्रेंड दर्शन का साधन है |

 

हैकेन आशी टेकनिक चार्ट : हैकेनआशी टेकनिक चार्ट या जिसे “एवरेज बार चार्ट” भी कहा जाता है एक जापानीज चार्ट टेकनिक है जो कैंडलस्टिक चार्ट को और सुधारित रूप में दिकती है जिससे ट्रेंड और फ्यूचर प्राइसेस का सही तरह से पता लगाया जा सकता है | आजकल बहुत सारे ट्रेडर्स यह चार्ट स्टाइल इस्तेमाल कर रहे है क्योकि यह उन्हें ट्रेंड आसानी से दिखा देता है और मार्केट वोलाटिलिटी को छुपा देता है |

हैकेनआशी टेकनिक चार्ट पिछले कैंडल का ओपन-क्लोज का डेटा के उपयोग करके और वर्तमान कैंडल के ओपन-हाई और लो का उपयोग करके एक कॉम्बो कैंडल तैयार करता है | जिसमे कीमतों में निर्माण हुआ नॉइज़ फ़िल्टर होके ट्रेंड के हिसाब से कैंडल्स बनती जाती है | जापानीज भाषा में हैकेन का अर्थ होता है “एवरेज” और आशी का मतलब होता है “पेस” अगर दोनों को जोड़ दे तो हैकेनआशी का मतलब बनता है कीमतों की एवरेज पेस एक्शन |

कागी चार्ट : कागी चार्ट का चार्टिंग स्टाइल भी मार्केट के प्राइस एक्शन पर बसा है और यह चार्ट भी टाइम को नजरअंदाज कर देता है | कागी चार्ट एक सिंपल लाइन चार्ट की तरह है जिसमे जब कीमते एक निर्धारित मात्रा में दिशा बदल होती है तो लाइन की भी दिशा उस मात्रा में बदल हो जाती है | कागी चार्ट में यिंग और यांग लाइन होती है जिनकी मोटाई और दिशा, कीमतों ने नया हाई या लो बनाने पर चेंज होता रहता है | कागी चार्ट का उपयोग इन्वेस्टर्स ज्यादातर स्टॉक में बेस्ट कीमत पर पैसा लगाने के लिए करते है | क्योकि कागी चार्ट में टाइम को कई महत्त्व नहीं है और चार्ट लाइन की  दिशाबदल सिर्फ विशिष्ट मात्रा में कीमतों में बदल आने पर ही होता है |

 

 

थ्री लाइन ब्रेक चार्ट :  थ्री लाइन ब्रेक चार्ट एक जापानीज चार्टिंग स्टाइल है जो कागी और रेनको चार्ट के समानरूप है | यहाँ भी टाइम को कोई महत्त्व नहीं दिया गया और चार्ट पर चेंज तभी आता जब कीमते एक विशिष्ट मात्रा में बदल होती है | थ्री लाइन ब्रेक चार्ट, हरे और लाल रंग की लाइनो से बनता है, जिसमे हरी लाइन बढ़ती हुई कीमते दर्शाती है तो लाल रंग की लाईने गिरती हुई कीमते दिखाती है | इस चार्ट में लाईने उसी दिशा में बढ़ती रहती है जब तक रेवेर्सल नहीं होता | जब क्लोजिंग प्राइस पिचले २ लाईनों के हाई या लो को पार कर जाती है तभी रेवेर्सल मूव चार्ट पर निर्माण होती है | थ्री लाइन ब्रेक चार्ट का मुख्य उपयोग सपोर्ट और रेजिस्टेंस ढूंडने के लिए, ब्रेकआउट खोजने के लिए और क्लासिक चार्ट पैटर्न्स का पता लगाने के लिए किया जाता है |

 

 

रेंज बार चार्ट : रेंज बार का निर्माण कीमतों और वोलाटिलिटी को ध्यान में रखकर बनता है इसका मतलब हर एक बार एक विशिष्ट प्राइस मूवमेंट आने पर ही बनता है और बार की संख्या वोलाटिलिटी को दर्शाती है | ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स को बार चार्ट के बारे में पता है की ३० मिनटों के टाइमफ्रेम में १ मिनटों के ३० बार दिखेंगे, मगर रेंज बार चार्ट में बार की संख्या उस वक्त की वोलाटिलिटी पर निर्भर करती है और यह कितनी भी हो सकती है | इसका मतलब है की ज्यादा वोलाटिलिटी होने पर ज्यादा संख्या में बार बनेगे और अगर वोलाटिलिटी कम रही तो बार की संख्या कम होगी | रेंज बार चार्ट टाइम के साथ मार्केट में निर्माण होने वाला बेकार का नॉइज़ को फ़िल्टर करके चेक साफ सुधारा चार्ट बनता है | यह होता क्योकि हर एक बार इस चार्ट में एक ही साइज़ का होता है | इस वजह से चार्ट में क्लियर कट ट्रेंड नजर आ जाता है और टाइम को नजरअंदाज कर दिया जाता है |

 

रेनको चार्ट : रेनको चार्ट यह चार्ट के एक प्रकार है जिसमे चार्ट को सिर्फ कीमतों की दिशा से मतलब होता है और उसे टाइम और वॉल्यूम से कोई वास्ता नहीं होता है | रेनको शब्द जापानीज शब्द “रेंगा” शब्द से उत्पन्न हुआ है जिसका मतलब होता है ईंट | रेनको चार्ट लाल और हरी ईंटो को तिरजी दिशाओ में आखकर बनता है, और हर एक नयी ईंट का निर्माण कीमतों ने पिछला हाई या लो पार करने पर करने पर ही बनती है | रेनको चार्ट लगभग पॉइंट एंड फिगर चार्ट की तरह ही होते है | फर्क सिर्फ इतना है की यहाँ X और O के कॉलम के बजाय चार्ट का निर्माण ईंटो से होता है जो एक फिक्स प्राइस मूवमेंट दर्शाती है | इन ईंटो को ब्लॉक्स या फिर बॉक्सेस भी कहा जाता है | यह ४५ अंश के कोन में ऊपर या निचे होती रहती है | अपट्रेंड को हरी रंग ही ईंटो की शृंखला से दिखाया जाता है तो डाउन ट्रेंड में लाल ईंटो का इस्तेमाल किया जाता है | रेनको चार्ट का उपयोग सपोर्ट और रेजिस्टेंस ढूढ़ने के लिए बखूबी किया जा सकता है |

यह सब मुख्य और गौण तरह के चार्ट के प्रकार और उनकी जानकारी है, जो पारंपारिक और गैर पारंपारिक ट्रेडिंग में अक्सर इस्तेमाल किये जाते है | आने वाले आर्टिकल्स में हम इन सब चार्ट प्रकार और स्टाइल्स का विस्तार से अध्यन करेंगे, और प्रोफेशनल प्रॉफिट मेकिंग स्ट्रेटेजी’ज को समझंगे जो चार्ट के टाइप नुसार होगी और कुछ प्रैक्टिकल रियल लाइफ उदहारण भी देखेंगे |

The Author

Pramod Baviskar

Professional Market Trader And Owner Of Dalal Street Winners Advisory And Coaching Services. Working Since 2007 And Online Presence Since 2010. We Provide Highly Accurate And Professional 1 Entry And 1 Exit Future, Option, Commodity, Currency And Intraday Stock Tips On Whatsapp With Live Support And Follow Up.
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