स्टॉक मार्केट की मूवमेंट को कैसे प्रेडिक्ट करते है ?

इस आर्टिकल में हम देखंगे की कैसे, प्रोफेशनल ट्रेडर्स, अलग अलग तरीकों का उपयोग हर दिन की मार्केट की चाल ट्रैक और प्रेडिक्ट करने और मार्केट परिणाम जानने के लिए करते है |

मार्केट की व्याख्या : मार्केट ख़रीददार और विक्रेताओ एकत्रित व्यवहार का परिणाम होता है | इसे “क्राउड” भी कहा जाता है | इसे “मार्केट क्राउड” भी कहा जाता है | यही लोग मार्केट में कीमत स्थापित करते है | कीमते हमेशा ट्रेंडीग मार्केट में एवरेज के इर्द गिर्द घुमती रहती है | जब मार्केट ट्रेंड में होता है तो मार्केट की चाल का अंदाज और भविष्यवाणी निम्नलिखित संकेतो को समजकर और उनपर ध्यान केंद्रित कर के प्रॉफिटेबल ट्रेडिंग की जा सकता है |

  • सप्लाई और डिमांड को समज़ना |
  • क्राउड के व्यवहार का विश्लेषण करना |
  • मार्केट का नार्मल क्या है पता करना | और
  • मार्केट एक्सट्रीम को मुनाफे में बदलना |

 

 

*मार्केट में सप्लाई और डिमांड को समज़ना : हर दिन के मार्केट में रूढ़िवादी अर्थशास्त्र के सप्लाई डिमांड काम नहीं करता है, तभी बहुत सारे ट्रेडर्स अपने मुर्खापूर्ण निष्कर्ष के वजह से नुकसान करते रहते है | रूढ़िवादी अर्थशास्त्र नुसार, जब कीमते बढती है तो डिमांड अपने आप कम हो जाती है | और जब कीमते कम हो जाती है तो डिमांड बढ़ जाती है | मगर इसके विपरीत व्यावहारिक स्टॉक मार्केट, फ्यूचर मार्केट, कमोडिटी मार्केट और करेंसी मार्केट में नीलामी वाला मॉडल काम करता है | नीलामी वाले मॉडल में जैसे वस्तु की कीमत ऊपर जाती है वैसे वैसे उसकी डिमांड बढती जाती है | और अगर वस्तु में कोई इंटरेस्टेड नहीं है तो वह वस्तु बगैर नीलामी के डब्बे में वापस चली जाती है | नीलामी में , वस्तु के “इंत्रेसिक वैल्यू या आतंरिक मूल्य” को कोई महत्व नहीं रहता | यह ट्रेडर्स हर रोज , स्टॉक्स के इंट्रा डे चार्ट पर देखते और विश्लेषित करते रहते है | कारण, क्योकि दिन में कम्पनी फंडामेंटल लेवल पर ज्यादा कुछ चेंज नहीं होता है तो भी न्यूज़ और मार्केट रिएक्शन से हम कम्पनी के स्टॉक की कीमतों में बहुत सारी उठा पटक देखते रहते है |

मार्केट में नीलामी वाला मॉडल का अभ्यास, और समझ ही एक ट्रेडर के लिए महत्वपूर्ण है और इससे आप डे टू डे मार्केट मूवमेंट्स का सही पता करके मार्केट में विनर बन सकते है |

*मार्केट में क्राउड का व्यवहार : टेक्निकल ट्रेडिंग में सब कुछ क्राउड कहा जा रहा है उस पर निर्भर करता है | क्राउड के साथ जाना या इस मोमेंटम को ज्वाइन करना, इसे “बैंडवैगन इफ़ेक्ट” कहते है | इसमे हर कोई इस बैंडवैगन में मार्केट न्यूज़ फ्लो नुसार बैठ जाता है और इससे हुई मार्केट मूवमेंट्स से मुनाफा कमाना चाहता है | मगर आगे चलके इस वजह से, मार्केट में “मानिया” और “पैनिक” वाली कंडीशन उत्पन्न हो जाती हे |

 

मार्केट मानिया में बायेर , स्टॉक को भावुक हो कर खरीदता रहता है | और उसके “इन्त्रेंसिक वैल्यू” की कोई परवाह नहीं करता हे | या फिर में इसे आगे ऊँची कीमत पर बेच पाउँगा या नहीं इसकी भी परवाह नहीं करता | पैनिक कंडीशन में इसके एक्साक्ट्ली विपरीत हो जाता है |  पैनिक फेज में लोग कुछ भी बराबर कीमत और जल्दी में बेच नहीं पाते तो वो पैनिक हो के कोई भी कीमत लेने के लिए तैयार हो जाते है क्योकि वो हर हाल में जो भी पैसा मिलता है, उसे वापस पाना चाहते है |

आर्थिक चक्र में “ मानिया और पैनिक “ वाली परिस्थिति एखाद बार आती रहती है, मगर ट्रेडर के जीवन काल में यह परिस्थितिया रोज देखने को मिलती है | हर एक स्टॉक, फ्यूचर, कमोडिटी या फिट करेंसी का अपना एक क्राउड होता है और उस क्राउड के हिसाब से ही कीमते मूव करती रहती है | स्मार्ट प्रोफेशनल ट्रेडर्स इन क्राउड की कमिया और खामिया खोजते है और उनका उपयोग करके ज्यादा से ज्यादा मुनाफा भुनाते है |

*मार्केट का नार्मल क्या है खोजना ? : सामान्यतः , क्राउड जो विशिष्ट स्टॉक या कमोडिटी में हमेशा ट्रेड करता रहता है | उसका उस स्टॉक या कमोडिटी पर पूरी तरह से पकड़ होती है और उसे डेली हाई और लो का अनुभव से अंदाज होता है | कोई भी मोटा बदलाव उस क्राउड के जल्दी से समझ में आ जाता है | कीमते नार्मल रेंज से ज्यादा मूव होने पर क्राउड एनालाइज करके प्राइस के विरुद्ध या फिर साथ में ट्रेड करता रहता है | क्योकि हाई और लो कीमते टेम्पररी होती है और थोड़े समय के बाद में कीमते एवरेजस की तरफ रुख करती है | इस घटना को “मार्केट रेवेर्जन” कहा जाता है |

कीमते सामान्यतः एवरेज के करीब ही घुमती रहती है | यह मार्केट संतुलन और उस दिन के कीमतों की तरफ आम सहमती दर्शाता है | कीमते जो एवरेज से दूर है , वो नॉर्मली एक यूनिट से ऊपर या निचे होती रहती है | और इस यूनिट को “स्टैण्डर्ड डेविएशन” के नाम से जाना जाता है |

यह चार्ट सेटिंग्स में बोल्लिंजर बैंड में २ यूनिट के डिफ़ॉल्ट वैल्यू से दिखाया जाता है | जो कीमतों की एक्सट्रीम कंडीशन दिखाता है |प्रोफेशनल ट्रेडर्स अनुभव से जानते है की मार्केट नार्मल क्या है | और वो एक्सट्रीम पॉइंट्स पर मार्केट के विरुद्ध ट्रेड करके भारी मुनाफा कमा लेते है |

*क्राउड एक्सट्रीम : क्राउड का व्यव्हार निम्नलिखित चार की पॉइंट्स से पहचाना जाता है | और वो है “संचय” “वितरण”, “स्थिति बदल“ और “ब्रेकआउट मूवमेंट्स”|

“संचय” का मतलब पहली बार खरीदना या फिर और खरीद करके संचय करना |

“वितरण” : “वितरण” में स्टॉक या कमोडिटी के कीमतों के भविष्य पर संदेह होने पर बिकवाली हावी हो जाती है |

“स्थिति बदल“ : “स्थिति बदल“ में आपकी पोजीशन को हल्का करना या फिर स्क्वायर ऑफ करके कैश पोजीशन में बैठना होता है |

“ब्रेकआउट मूवमेंट्स” : “ब्रेकआउट मूवमेंट्स” में सपोर्ट या रेजिस्टेंस तोडके स्टॉक जब नयी जोन में एंट्री करत है तो उसे “ब्रेकआउट मूव” कहते है |

जब कीमते नार्मल रेंज लिमिट जो इंडीकेटर्स ने निर्धारित की है उसे तोडके नए जोन में ट्रेड करती है तो उसे “एक्सट्रीम लेवल “ कहा जाता है |जब हर कोई जो अपट्रेंड में स्टॉक को खरीदना चाहता है तो “ओवर बाउट “ कंडीशन रूप लेती है | और जब डाउन ट्रेंड में हर कोई बेचना चाहता है तो “ ओवर सोल्ड “कंडीशन रूप लेती है | यह मार्केट के एक्सट्रीम रूप है और यहाँ प्रोफेशनल ट्रेडर्स स्टॉपलोस लगाके मार्केट के विरुद्ध ट्रेड करते है |

मार्केट में प्रत्येक क्राउड अलग होता है | कोई क्राउड सपोर्ट और रेजिस्टेंस का आदर करता रहता है तो कोई क्राउड उसे हमेशा तोडके सेलिंग स्टार्ट होने पर सस्ता बाय करके रेवेर्सल दे देता है |

प्रोफेशनल ट्रेडर्स यह सब का अभ्यास करने के बाद सोच कर और समझ कर ट्रेड करते है | ट्रेंड के विरुद्ध दिशा में आने वाले मूव को “रेत्रसमेंट” कहा जाता है | अपट्रेंड में रेत्रसमेंट मतलब कीमतों में गिरावट होना होता है | जब की डाउन ट्रेंड में रेत्रसमेंट हमेशा कीमतों में उछाल के रूप में होता है | उसे “पुल बैक्स “ कहा जाता है | कभी कभी रेत्रसमेंट हद्द के बाहर चले जाते है और ट्रेंड रेवेर्सल में परावर्तित हो जाते है | एक सामान्य रेत्रसमेंट जो पोजीशन स्क्वायर करने के वजह से आया होता है, वो अगर उसी वक्त सम्बंधित न्यूज़ आने की वजह से पूरी तरह से ट्रेंड रेवेर्सल में तपदिल हो सकता है |

यह एक डे ट्रेडर्स के दैनदिन में हमेशा होता है | प्रोफेशनल ट्रेडर्स यह करेक्शनस और पुलबैक्स हमेशा वाच करते रहते है और रेवेर्सल होने पर स्टॉप लोस के साथ बड़ी ट्रेड डालके मोटा मुनाफा कमा लेते है | यह करेक्शन या पुलबैक्स कब ख़त्म होगा और कब प्राइमरी ट्रेंड दुबारा आरंभ होगा इसका कोई नियम नहीं है मगर यह चार्ट पर पहले ही दिख जाते है और इंडीकेटर्स और ओस्सीलेटर्स का विश्लेष्ण करके यह पता लगाया जा सकता है मगर इसके लिए अनुभव जरुरी होता है | इसके लिए कोई पक्का नियम इन प्रोफेशनल के पास नहीं होता है मगर वो अनुभव के साथ सामान्य नियमो का पालन करते है |

वो है :

  • रेत्रसमेंट पिछले हाई या लो को क्रॉस न करे |
  • ३०% करेक्शन का नियम
  • कही प्रोफेशनल गन’स ५०% रेत्रसमेंट रूल का पालन करते है |
  • कोई फिबोनाच्ची रेत्रसमेंट थ्योरी को उपयोग में लता है |
  • या फिर कोई इलियट वेव थ्योरी का उपयोग करेक्शन और रेवेर्सल की भविष्यवाणी के लिए करता है |

 

इन सब थ्योरीज और नियमो का उपयोग करने के लिए अभ्यास और अनुभव दोन्हो की जरुरत पड़ती है |

यह मुख्य चार टूल्स है | जो प्रोफेशनल ट्रेडर्स के पास होते है जिससे वो हर रोज मार्केट को ट्रैक और मार्केट के मूवमेंट्स प्रेडिक्ट करके पैसा बनता है | आशा करता हू के यह सब जानकारी आपको आईडिया देगी की कैसे मार्केट को ट्रैक करते है , और उसकी मूवमेंट्स कैसे प्रेडिक्ट करते है | आने वाले पोस्ट में हम इन सभी पैलू का विस्तार से अभ्यास करेंगे और कुछ प्रैक्टिकल ट्रेडिंग के उदहारण चार्ट पर भी देखेंगे |

The Author

Pramod Baviskar

Professional Market Trader And Owner Of Dalal Street Winners Advisory And Coaching Services. Working Since 2007 And Online Presence Since 2010. We Provide Highly Accurate And Professional 1 Entry And 1 Exit Future, Option, Commodity, Currency And Intraday Stock Tips On Whatsapp With Live Support And Follow Up.
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