अलग समयसीमा नुसार कीमतों की दिशा

ट्रेंड यह एक विविधता से भरा हुआ और एक लचीली संकल्पना है जो ट्रेडर्स के जरूरतों के से हिसाब से बदली जा सकता है | ट्रेंड की अलग परिभाषा यह भी है की “कीमतों की दिशा जो इंडीकेटर्स के द्वारा पहचानी जा सके” | हर एक ट्रेडर अपने जरुरत , अपनी समज और अपने जोखिम अनुसार ट्रेंड का उपयोग करता है | जब कीमते इंडीकेटर्स के अनुसार उचित दिशा में गतिनुसार प्रस्थान करने लगती है तो उसे “त्रेन्डिंग” कहा जाता है |

 

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अलग समयसीमा नुसार कीमतों की दिशा

ट्रेंड की विशेषताए

हर एक स्टॉक या कमोडिटी का अपनी खुद की त्रेन्डिंग विशेषताए होती है | सी लिए एक सेक्टर्स के सभी स्टॉक अलग अलग ट्रेंड और ट्रेड होते है | कुछ स्टॉक दूसरो से ज्यादा और अच्छे तरीके से ट्रेंड होते है और वो ट्रेडर्स के पसंदीदा होता है तो कुछ स्टॉक इतने ढीले होते है की उनको टेक्निकल एनालिसिस के मदत से न ट्रेड किया जा सकता और ना उनमे निवेशित हो सकते है | स्टॉक की वोलाटिलिटी और मार्केट का उसमे दिलचस्पी यह भी प्रात्यक्षिक कारण होते है | कुछ स्टॉक ट्रेंड को उम्मीद से ज्यादा वक्त तक पालन करते है तो कुछ वक्त से पहले ही घूम जाते है | यह सब एक ट्रेडर्स चार्ट देखकर बता सकता है , यही कारण है की एक ट्रेडर्स को हमेशा ट्रेड या निवेश करने से पहले स्टॉक का टेक्निकल चार्ट जाचना चाहिए नहीं तो आप एक गलत ट्रेड में या भी मृत निवेश में फ़स सकते है | बहुत से नए ट्रेडर्स और निवेशको के साथ अक्सर यही होता है |

 

और जानने के लिए पढिये : टेक्निकल एनालिसिस काम करता है या नहीं ?

 

आप अगर एक चार्ट पर दस अलग ट्रेडर्स की राय मांगेंगे तो आपको सब अलग अलग राय मिलेंगी क्योकि हर एक व्यावसायिक ट्रेडर्स का अपना एक अंदाज और जोखिम होता है और वो उसी हिसाब से अपनी राय रखता है | इसी लिए एक ही चार्ट पर आपको दस अलग सुजाव और ट्रेड मिलेंगे | मेरे अनुभव से कमोडिटी और करेंसी वैश्विक होए के कारण ज्यादा ट्रेंड होती है और उसकी तुलना में स्टॉक में लोकल फैक्टर्स ही होते है और वो तुलनात्मक कम ट्रेंड पालन करते है |

क्योकि कमोडिटी और करेंसी अर्थव्यवस्था से सीधे जुडी होती है और स्टॉक्स का तुलनात्मक कम संबंध होता है | एक अनुभवी और चालक ट्रेडर्स हमेशा अपने स्टॉक ये कमोडिटी के साथ योग्य समय बिताता है और जाचता है की कम स्टॉक ट्रेंड होता है और कब नहीं | इससे उसे ट्रेडिंग की आईडिया आ जाती है |

ट्रेंड की पहचान

ट्रेंड की पहचान

कोई भी स्टॉक या कमोडिटी हर समय ट्रेंड में नहीं रहते | अच्छे से अच्छा स्टॉक या कमोडिटी कुछ समय साइड वेज़ ट्रेंड में बिताता है | साइड वेज़ ट्रेंड को ही कंसोलिडेशन कहा जाता है | कंसोलिडेशन में कीमतों में ज्यादा उतार और चढाव न होकर वो एक सीमा या फिर लाइन में घुमती रहती है | यह परिस्थितिया ट्रेडिंग करने के लायक नहीं होती और ये आने वाले अपट्रेंड या फिर डाउन ट्रेंड का संकेत होता है | एक अनुभवी ट्रेडर या इन्वेस्टर औरो से पहले इस समय का उपयोग स्टॉक का संचय या फिर निकने के लिए करता है |

 

और जानने के लिए पढिये : टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग निवेशक करे या ना करे ?

 

आप चार्ट की समय सीमा नुसार उसका उपयोग कीमतों की दिशा योग्य तरीके से पहचाने के लिए कर सकते है | उदारण स्वरुप अगर स्टॉक दिवसीय चार्ट पर कंसोलिडेशन दिखा रहा है तो निवेशक साप्ताहिक या मासिक चार्ट देख कर ये पता कर सकता है की ये कंसोलिडेशन लम्बे समय के अपट्रेंड या फिर डाउन ट्रेंड का भाग है | जब कीमते मुख्य औसत को ऊपर के तरफ पर करती है तो उसे बुलिश ट्रेंड कहते है और जब वो औसत के निचे टूट जाती है तो उसे बीयरिश ब्रेकडाउन कहते है |

ट्रेंड और समय सीमा

ट्रेंड और समय सीमा

चार्ट की समय सीमा बदलने पर कीमतों ट्रेंड का परिपेक्ष्य भी बदल जाता है | उदारण स्वरुप दिवसीय चार्ट पर अपट्रेंड में दिखनेवाला स्टॉक मासिक चार्ट पर डाउन ट्रेंड में हो सकता है | मुख्य ट्रेंड हमेशा अंतर्निहित अप्रधान ट्रेंड पर असर डालता है | इसी लिए एक खोजी ट्रेडर हमेशा मुनाफे वाले ट्रेड में एक अच्छा प्रवेश और निर्गम पता है | इसी लिए एक ट्रेडर्स को अपने जोखिम और समयानुसार चार्ट की समय सीमा चुननी चाहिए और उसके अनुसार ही ट्रेडिंग करनी चाहिये | एक शोर्ट टर्म ट्रेडर्स अगर साप्ताहिक या मासिक चार्ट देखकर ट्रेडिंग के फैसले लेता है तो वो बहुत बार नुकसान से गुजरेगा और एक निवेशक अगर तासिक या दैनिक चार्ट देखकर निवेश का फैसला लेता है तो वो एक बुरे निवेश में फ़स सकता है | इसी लिए आप ट्रेंड को उसकी समय सीमा बिना बताये समजा या फिर उपयोग में नहीं ला सकते |

 

और जानने के लिए पढिये : स्टॉक मार्केट के चार्ट के प्रकार

 

अगर आप ऐसा करते है तो वो टेक्निकल दृष्टिकोण से पूरी तरह गलत होगा | यही मार्केट की जटिलताए है जो एक सामान्य ट्रेडर्स को समज नहीं आती है | मार्केट हमेशा एक गतिशील और बदलाव युक्त इकाई है | तो अगली बार से आप अगर ट्रेंड को समजा रहे हो तो वो किस समय सीमा का है ये बताने से ना चुके |

Hindi -Why technical analysis sometimes work sometime not?

क्यों टेक्निकल एनालिसिस कभी काम करता है और कभी नहीं करता ?

क्यों टेक्निकल एनालिसिस कभी काम करता है और कभी नहीं करता ?

टेक्निकल एनालिसिस क्या है ?

टेक्निकल एनालिसिस में कीमतों का अभ्यास किया जाता है , जो की बाज़ार में लोंगो के मनोदशा और भावनावो का प्रतिनिधित्व स्वरुप है | इसी वजह से टेक्निकल एनालिसिस ज्यादातर बार काम करता है , क्योकि सामान्य रूप से लोग समान परिस्थितियों में एक जैसे निर्णय या फिर गलतिया करते है | जो चार्ट पर समान प्राइस पैटर्न्स या फिर टेक्निकल पैटर्न बनाते रहते है और यह प्रक्रिया बार बार होती रहती है |

कीमतों की दिशा या ट्रेंड्स चार्ट पर मूविंग अवेरेजेस और इंडीकेटर्स की मदत से खोजी जा सकती है | और उनकी हद या फिर सीमा चार्ट पर सपोर्ट और रेजिस्टेंस खीचकर निर्देशित किये जा सकते है | ये एक सीधी और साधा तरीका है मगर इसमें अनुभव जरुरी होता है |

जब कीमते रेजिस्टेंस को लांघकर ट्रेड करने लगाती है तो उसे “बुलिश ब्रेकआउट” कहा जाता है , उसी तरह जब कीमते सपोर्ट क निचे टूट जाती है तो उसे “बिअरिश ब्रेकडाउन” कहा जाता है | ब्रेकआउट की घटना एक ट्रेडर के लिए बहुत महत्व पूर्ण होती है और वो ट्रेडर्स के लिए एक शक्तिशाली हत्यार की तरह काम करता है | ब्रेकआउट कीमतों और इंडीकेटर्स में भी देखा जा सकता है और उपयोगी होता है |

ब्रेकआउट लगभग ८०-९०% समय काम करता है और सही दिशा में ट्रेड करने वालो को मोटा मुनाफा कमाकर देता है | ज्यादातर ब्रेकआउट और ब्रेकडाउन मुख्य दिशा परिवर्तन के समय होता है और ट्रेडर्स को एक मुनाफे वाली रैली मिल जाती है |

कभी कभी टेक्निकल एनालिसिस क्यों काम नहीं करता ?

कभी कभी टेक्निकल एनालिसिस क्यों काम नहीं करता ?

टेक्निकल एनालिसिस कभी कभी किसी ट्रेडर के लिए कम नहीं करता और उसका मुख्य कारण होता है , अनुभव की कमी | जो लोग या ट्रेडर्स मार्केट में नए है वो ज्यादातर पकीमतों को या फिर इंडीकेटर्स को अच्छे से नहीं समज पाते और गलती कर बैठते है | इसी कहते है की लिए एक यशस्वी ट्रेडर्स के पीछे उसके अनुभव का हाथ होता है | ज्यादातर व्यावसायिक और नए ट्रेडर्स एक ही तकनीक अपनाते है मगर व्यवसायिक ट्रेडर मुनाफा कमाता है और उसी तकनीक से नए ट्रेडर्स को नुकसान होता है | यह कही बार देखा गया है |

दूसरा यह की बहुत बार ट्रेडर्स चार्ट्स, प्राइस पैटर्न और इंडीकेटर्स के ऊपर इतना निर्भर हो जाते है की वो मार्केट की परिस्थितियों को जानना और समज़ना भूल जाते , और अपने इस छोटे कोष से बाहर न आने की वजह से गलत साबित होते रहते है |

यही व्यवसायिक ट्रेडर्स मार्केट और उतार-चढाव के हिसाब से अपनी तकनीक और इंडीकेटर्स को ट्यून करते रहते है | जैसे की ज्यादा चढ़ उतार वाले मार्केट में चार्ट पर फाल्स ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन होने पर ट्रेडर्स को मुख्य ट्रेंड के साथ रहना चाहिए | दूसरा उदहारण में बुल मार्केट में कीमते ओवर बाउट स्थिति में हप्ते या फिर महीनो तक ट्रेंड करती है और बीच बिच में गलत सेल सिग्नल निर्माण होते है |

कभी कभी कुछ तकनीक कुछ वक्त तक ही काम करते जाते है क्योकि मुख्य मार्केट मेकर्स वही टेक्निक्स उपयोग में लाते है और उनपर ही उस वक्त भरोसा बैठ होता है , इसे “सेल्फ फुल फिलिंग प्रोफेसी” भी कहा जाता है |

कुछ ट्रेडर्स बहुत सामान्य तकनीक उपयोग करते है और फिर भी मुनाफा कमाते है और कुछ जटिल और महंगी ट्रेडिंग सिस्टम का उपयोग करके भी सदा नुकसान में ही बैठे होते है | ये इस लिए होता है क्योकि व्यावसायिक ट्रेडर्स जो गैर प्रचलित ट्रेडिंग की रणनीति बनाते है वो अनुभव पर आधारित होती है और उसकी मार्केट पर पूरी पकड़ होती है | ट्रेडिंग का मुख्य उद्देश मुनाफा कमाना है न की वैज्ञानिक तरीकेसे सही रहना |

टेक्निकल एनालिसिस की पड़ताल

टेक्निकल एनालिसिस की पड़ताल

टेक्निकल एनालिसिस कीमतों का पूर्वानुमान लगाने का शास्त्र है जो की हर समय १००% काम नहीं करता है मगर इसका अर्थ यह नहीं की ये भरोसा करने के लायक नहीं है | जितने भी पूर्वानुमान लगाने के शास्त्र और व्यवसाय है उनकी खुद की कुछ कमिया हमेशा रहती है मगर इसका ये अर्थ नहीं होता की वे सब बेकार है , जैसे की मौसम अनुमान इत्यादी |

स्टॉक मार्केट में किसी भी विश्लेषनात्मक पद्धति का मूल्य उसकी कामयाबी या फिर मुनाफा बनानेकी शक्ति पर निर्भर होती है | अगर वो पद्धति लगतार मुनाफा बनती हो तो वो वैज्ञानिक दृष्टी से शायद गलत हो मगर ट्रेडर्स के लिए उपयोगी होती है | क्योकि मार्केट से ट्रेडिंग में मार्केट से पैसे बनाना ही उद्देश होता है न की वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सही होना |

 

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बाज़ार में कीमत हमेशा सही होती है

सबकुछ कीमतों के बारे में

सबकुछ कीमतों के बारे में

बाज़ार में कीमते भीड़ तय करती है | खरीददार और बेचनेवाले को बिच के टकराव से कीमते तय होती है और इजाद होती है | कीमतें में बाज़ार की सभी आधारभूत जानकारी , समाचार, और लोंगो की मान्यताये सम्मीलित होती है | इसे सिद्धन्त को “मार्केट डिस्काउंट मैकेनिज्म” के नाम से भी जाना जाता है | जैसे मार्केट में मान्यताये बदलती है या समाचार आते या फिर फंडामेंटल्स बदलते है, हमे कीमतों में तेजी से उतार चढाव देखते है |

आधारभूत जानकारी में सैकड़ो तत्व शामिल होते है जैसे मार्केट या फिर शेयर को तथ्य, बाजार की राय , चरम अनुमान, बाज़ार समाचार और लोगोंकी धारनाये | यह सभी चीजे बाज़ार में आपूर्ति और मांग में बदलाव करती रहती है और उसी वजह से हम हर एक सेकंड में कीमतों में चढाव और उतार देखते है |

डॉव थ्योरी और कीमतों का संबंध

डॉव थ्योरी और कीमतों का संबंध

चार्ल्स डॉव जिन्होंने “द वाल स्ट्रीट जर्नल” की स्थापना की थी, उनके हिसाब से मार्केट में एक ही चीज सच्ची और भरोसे के लायक होती है और वो थी “कीमत” | उनका कहना था की कीमते हमेशा बाज़ार तथ्य, अफवाए, बाज़ार का शोर होते हुए भी कीमते अपनी दिशा में यात्रा करती रहती है | और मेरे हिसाब से भी बाज़ार में एक ही चीज जो सामने दिखती है और उसपर भरोसा किया जा सकता है वो है “कीमत” |

चार्ल्स डॉव ने जो मार्केट में निरीक्षण किया था, उन्होंने उन्हें अधोरेखित किया था जिसे आज “डॉव थ्योरी “ के नाम से जाना जाता है |

 

डॉव थ्योरी

1. कीमते हमेशा ट्रेंड में घुमती रहती है |

2. एक ट्रेडर ट्रेंड को देख सकता है और पहचान सकता है | ट्रेंड नियमित रूप से दिखाई देते है और कई बार दोहराए भी जाते है |

3. प्राइमरी ट्रेंड ही मुख्य होते है और सेकेंडरी ट्रेंड्स को रेत्रसमेंट कहा जाता है जो ट्रेड करने के हिसाब से मुश्किल होते है |

4. प्राइमरी ट्रेंड उसकी दिशा में प्रस्तान करता रहता है जब तक बाजार में कोई मुख्य और मौलिक बदल नहीं होता |

कीमत और मूल्य

कीमत और मूल्य

कीमत और मूल्य ये दोनों अलग है | टेक्निकल एनालिसिस की मदत आप कीमतों की सही खोज कर सकते हो और फंडामेंटल एनालिसिस से उनके सही मूल्यों का अभ्यास कर सकते हो | जो शेअर्स की कीमते अपनी मूल्य से ज्यादा कीमत पर ट्रेड होती है, उन शेअर्स को “ओवर वैल्यूड शेअर्स” कहते है | ये उस कंपनी के समृद्ध और संपन्न भविष्य , बाज़ार की अफवाए या फिर ट्रेडर्स की भावनाओं की वजह से होता है |

अगर शेअर्स की कीमत उसकी मूल्य से ज्यादा कीमत पर ट्रेड होती है तो मूल्य और कीमत के अंतर को “प्रीमियम” कहा जाता है | उसी प्रकार अगर शेअर की कीमत उसके मूल्य के निचे ट्रेड होती है तो इस अंतर को “डिस्काउंट” कहा जाता है |

यह प्रीमियम और डिस्काउंट एक निवेशक के लिए हमेशा महत्वपूर्ण होते है | एक होशियार ट्रेडर हमेशा टेक्निकल एनालिसिस और फंडामेंटल एनालिसिस की मदत से अच्छी तरह से ट्रेडिंग करता है और उसके मदत से ही अपनी जोखिम को भापता है और उसका उपयोग दैनदिन ट्रेडिंग में करता है |

चलो इसको एक उदाहरण से समज़ते है | मंदड़ियों के बाजार में ब्लू चिप शेअर्स (मौलिकरूप से मजबूत शेअर्स ) के भाव स्माल और मिडकैप शेअर्स के मुकाबले कम गिरते है यह अपने देखा होगा | मुख्य इंडेक्स शेअर्स में ट्रेडिंग करना अन्य शेअरो के मुकाबले कम जोखिम भरा होता है | क्योकि इन शेअर्स को उनके मौलिक आधारों पे और कम्पनी मैनेजमेंट के गुणवता की आधार पर ही मार्केट रेगुलेटर इंडेक्स में शामिल या फिर बाहर करता है |

टेक्निकल एनालिसिस के साथ फंडामेंटल एनालिसिस का उपयोग एक उत्प्रेरक की तरह काम करता है | उससे एक ट्रेडर को मार्केट को जितने का मोका मिलता है | प्रोफेशनल ट्रेडर्स हमेशा फंडामेंटली शक्तिशाली कंपनियों के शेअर्स में ही ट्रेडिंग करना पसंद करते है | और टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग खरीदने और बेचने के निर्णयो को लेने में उपयोग में लाते है |

कीमते और टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग

कीमते और टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग

टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग ट्रेडिंग कम्युनिटी के लिये नया नहीं है , इसकी शुरुवात सन १८०० में जापान में चावल के व्यापारी भविष्य की कीमतों का अंदाज़ लगाने के लिए निजी तौर पे किया करते थे | टेक्निकल एनालिसिस को ट्रेडिंग की समजवाले बुद्धिमानी लोंगो इजाद किया और उसे विकसत करते रहते है | क्योकि जटिल गणित कोई बच्चो का खेल नहीं है |

टेक्निकल एनालिसिस ये कंप्यूटर , ट्रेडिंग सिस्टम्स और चार्टिंग सॉफ्टवेयर के इजाद के पहले से ही मौजूद है और नियमित उपयोग में लाया गया है | ये दुनिया में लगभग २०० से ज्यादा साल जी चूका है और आगे भी भविष्य में उपयोग में लाया जायेगा और विकसित होता रहेगा | हर साल नए अवधारणाये, इंडीकेटर्स , चार्टिंग स्टाइल इ. खोजे जाते है और ट्रेडर्स उनका उपयोग करते है और खुद को और बेहतर बनाते जाते है |

तांत्रिकी विश्लेषण टूलबॉक्स

Technical analysis introduction

तांत्रिकी विश्लेषण परिचय

तांत्रिकी विश्लेषण एक स्टॉक मार्केट में कीमतों परखने और उनकी भविष्यवाणी करने की पद्धति है जिसकी मदत से ट्रेडर अपने ट्रेडिंग और निवेश संबंधी फैसले ले सकते है | तांत्रिकी विश्लेषण मतलब सिर्फ चार्ट पढना, संकेतोको विश्लेषण करना और चार्ट पैटर्न्स का परिक्षण करना इतना ही न होकर ये जोखिम प्रबंधन और इन सभी के मदत से फायदा कमाने के काम में भी आता है |

 

अगर आप मार्केट में मुनाफा कमाना चाहते हो तो आपको तांत्रिकी विश्लेषण पद्धति का उपयोग एक परियोजना की तरह करना होगा जिससे आप अनुमानित जोखिम ले सके और अच्छे तरिकिसे ट्रेडिंग कर सके. क्योकि अंत में आप कितना मुनाफा कमाते हो ये सबसे जरूरी भाग होता है न की आप कितनी अच्छी तरह से चार्ट पढ़ते हो या चार्ट पैटर्न कितने अच्छे से पहचानते हो फिर संकेतो को जानते हो | ट्रेडिंग व्यापर का मुख्य काम मुनाफा बनाना है ना की चार्ट पढ़ना , संकेतो को पहचाना और प्राइस पैटर्न का सही होना | ये दोनों अलग चीजे है मगर ये एक दुसरे के बजाय मुमकिन नहीं हो सकती |

 

Technical traders

तांत्रिकी व्यापारी

तांत्रिकी विश्लेषण में ट्रेडर कीमतों को देखना , उनको मापना और वो किस दिशा में जा रही है ये सब चाहता है | कीमतों की दिशा और दशा ये भीड़ की मनोदशा का परिणाम होता है | इस पद्धति का यही काम है की कीमतों को देखना , उससे जोखिम का पता लगाना और पिछली कीमतों के नियमित-अनियमित स्वरुप से भविष्य की कीमतों का पूर्वकथन करना |

 

व्यावहारिक ट्रेडिंग में समय को सबसे ज्यादा महत्व है | सही समय पर ट्रेड में प्रवेश और निर्गम तय करता है की आपको कितना मुनाफा होनेवाला है | ट्रेडिंग ये समय , विश्लेषण और अनुभव का व्यवसाय है और आपकी सफलता इन्ही तिन चीजों पर निर्भर करती है | जिसने इन तिन कला को अवगत कर लिया उसे सफल व्यापारी होने से कोई नहीं रोक सकता |

 

Technical analysis wisdom

तांत्रिकी विश्लेषण बुद्धिमत्ता

आजकल तांत्रिकी विश्लेषण एक व्यापारी की ट्रेडिंग जीवन में या फिर ट्रेडिंग फैसलों में किसी न किसी तरह शामिल होता है और उसकी सफलता की संभावनो को बढ़ता है | क्योकि अलग अलग व्यापारी एक ही समय कीमतों का अनुमान और सामान्य संकेतो का इस्तेमाल करते है जिससे कीमतों को दिशा और गति मिलने में मदत होती है |

 

अगर आपको एक सफल तांत्रिकी व्यापारी बनाना है तो आपको ट्रेडिंग करते समय स्वतंत्र सोच रखनी होगी , हर एक कृति का उतरदायित्व लेना होगा और ज्ञान को अपनाना होगा न की मन की सोच को | एक सफल तांत्रिकी व्यापरी हमेशा नुकसानदायक ट्रेड्स को कम करता है और मुनाफेवाले ट्रेड को बढ़ता और लक्ष्य तक हात में रखता है | नए और अननुभवी व्यापारी इसके उलट करते है और व्यापर जीवन में यैसी जगह पहुच जाते है जहा उनको नहीं जाना था |

 

अच्छे तांत्रिकी विश्लेषण से मार्केट को पछाड़ना हमेशा आनंददायी और इनाम स्वरुप होता है और व्यापारी का आत्मविश्वास बढ़ाने में मदत करता है | मार्केट नहीं जानता की आप कोण हो या फिर या फिर क्या करते हो , वो सिर्फ अच्छे और बुरे ट्रेडर्स को जानता है और उन्हें इनाम या नुकसान देने का काम करता है | अगर आपको हारे हुये व्यापारियों के पंक्ति में नहीं बैठना है तो आज से ही तांत्रिकी विश्लेषण के टूलबॉक्स का इस्तेमाल करना सिखाना होगा और अपने ट्रेडिंग जीवन को समृद्ध और सफल बनाना होगा |

टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग निवेशक करे या ना करे

 

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टेक्निकल एनालिसिस एक साधन

हमने देखा है की कैसे टेक्निकल एनालिसिस ट्रेडर्स को शेअर्स की कीमते समज़ने का मोका देता है और मार्केट में मांग और आपूर्ति का अभ्यास करता है | एक अनुभवी ट्रेडर इस जानकारी का उपयोग करके मार्केट में मुनाफा कमा सकता है और इसी की मदत से अपना जोखिम कम करने की कोशिश करता है |

 

टेक्निकल एनालिसिस का आपके क्रियात्मक ट्रेडिंग जीवन में उपयोग करना एक यशस्वी ट्रेडर्स का लाइफ मंत्रा होता है | मैंने पहले भी कहा है की ट्रेडिंग एक सही समय पर सही जगह होकर सही चीज़ खरदीने का खेल है | ट्रेडिंग में समय सुचकता ही सबकुछ है | एक ट्रेडर्स का कम है की कीमतों अभ्यास करे और उससे भविष्य की कीमतों का अनुमान निकले और इस जानकारी का उपयोग करके बाज़ार में खरीदी या बेचकर मुनाफा कमाए |

टेक्निकल एनालिसिस ये एक ट्रेडर्स का महत्वपूर्ण साधन है जो हर एक पल हजारो ट्रेडर्स को उनका खरीदने या फिर बेचने का फैसला लेने में मदत करता रहता है | यह सिर्फ ट्रेडर्स ही नहीं निवेशको भी उसी तरह मदतपूर्ण होता है |

इतिहास में हमेशा ये दुविधा रही है के टेक्निकल एनालिसिस एक निवेशक के काम करता है की नहीं | मगर में अनुभव के साथ कह सकता हू के टेक्निकल एनालिसिस स्टडी एक निवेशक के उसी प्रकार मदत करती है जिस प्रकार ट्रेडर्स को होती है | दोनों में अंतर सिर्फ होल्डिंग समय का होता है |

 

क्योकि ट्रेडर्स की शेअर्स होल्डिंग की अवधि अल्प होती है तो एक निवेशक महीने या सालो तक निवेशित रह सकता है | मेरे हिसाब से एक ट्रेडर और निवेशक में ज्यादा अंतर नहीं होता | एक ट्रेडर्स एक निवेशक भी सकता अगर शेअर्स का मुख्य ट्रेंड स्ट्रोंग बुलिश हो | या फिर एक निवेशक एक ट्रेडर में तपदिल हो जाता है अगर उसका टारगेट अल्पावधि में ही पूरा हो जाता है तो |

मेरे विचार से आप एक निवेशक है या फिर ट्रेडर्स ये मायने नहीं रखता जब तक आप मुनाफा कमाते रहे और अपना जोखिम अच्छे से संभालते रहे |

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ट्रेडर्स या निवेशक दुविधा

 

सुरवात में अनुभवहीन ट्रेडर्स इसी दुविधा में फसे रहते की में एक ट्रेडर्स बनू या फिर या एक निवेशक और उनका मार्केट में आने मुख्य उदेश्श भूल जाते जो है मुनाफा कमाना या फिर पूंजी को बढ़ाना |

टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग एक ट्रेडर १ घंटे के ट्रेड के लिए कर सकता है या फिर एक निवेशक १० साल की निवेश के लिए भी कर सकता है | एक ट्रेडर्स को टेक्निकल एनालिसिस स्टडी छोटी अवधि के ट्रेडिंग के मोके धुंडने में मदत करता है और कम अवधि में मुनाफा कमाने का मदत करता है तो एक निवेशक को बॉटम में निवेशित होने का और टॉप पर निकालने का मोक़ा बताता है | टेक्निकल स्टडीज के द्वारे निवेशक अपने मुनाफे वाले पोजीशन में संचय करने का और थोडा थोडा मुनाफा वसूलने का भी रास्ता अपना सकता है | अगर किसी शेअर्स मुख्य ट्रेंड अगर ख़राब हो जाता है तो ये भी टेक्निकल एनालिसिस के मदत से जल्दी समाज में आता है और निवेशक उस शेअर्स से जल्दी निकलकर अपना मुनाफा बचा सकता अहि या फिर नुकसान को कम कर सकता है |

 

इसी लिए टेक्निकल एनालिसिस को एक हत्यार की तरह उपयोग में लाके ऐसी परिस्तिथियो में ट्रेडर्स या फिर निवेशक अच्छे फैसले कर कम नुकसान या फिर मुनाफा लेकर निकल सकता है | इसी तरह टेक्निकल एनालिसिस अलग लग शेअर्स और सेक्टर्स को जाच कर उनमे कितने मौके है ये भी ट्रेडर्स और निवेशको दर्शता है और आपकी पूंजी को अलग अलग जगह लगने और घुमाने में मदत करता है | इन सब चीजों से ही एक ट्रेडर या फिर निवेशक मार्केट को पछाड़ सकता है | ये चीजे एक ट्रेडर को भी उसी तरह से लागु होती जैसे एक निवेशकको |

 

आखिर में सारांश में ये कह सकते है की आप एक ट्रेडर्स हो या एक निवेशक उससे कई फर्क नहीं पड़ता | इसमें दुविधा नहीं होनी चाहिए की कोण टेक्निकल एनालिसिस उपयोग कर सकता है | आप अपना गोल पूरा करने में या फिर मार्केट हो पछाड़ने में टेक्निकल एनालिसिस के ब्रांचो का बखुबिसे उपयोग कर सकते है |

स्टॉक मार्केट का इतिहास हिंदी में

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स्टॉक मार्केट की व्याख्या

स्टॉक मार्केट व इक्विटी मार्केट अथवा शेयर बाज़ार एक संस्था की तरह होता है जहा ख़रीददार और बिचौलिए शेयर्स व अन्य आर्थिक साधनों की लेंन-देंन करते है | पुराने दिनों में शेयर्स का लेंन देंन भौतिक सर्टिफिकेट के स्वरुप में होता था मगर नयी टेक्नोलॉजी की वजह से वो अब लगभग आभासी मंच से होने लगा है | शेयर ट्रेडिंग वास्तविक स्वरुप में भी होती है मगर वो अब बड़ी आर्थिक संस्थाए, बैंक और बड़े व्यापारी ही करते है |
२०१२ के ख़त्म होते होते , जागतिक शेयर बाज़ार का पूंजीकरण लगभग ५५ लाख अरब था | उसमे अमिरीकी मार्केट का हिस्सा ३४% था, जापान और यूके का सहभाग ६% के करीब था |
विश्व में लगभग ६० शेयर बाज़ार है और उनकी पूंजी एकत्रित की जाये तो वो लगभग ६९ लाख अरब की करीब आएगी. उसमे से प्रमुख १६ बाज़ार का पूंजीकरण १ लाख अरब से जादा है और उनका आरती विश्व बाज़ार में हिस्सा करीब ८७% के करीब है | इन १६ मुख्य बाजारों को तिन खंडो के हिसाब से आक़ा जाता है और वो है आशियाई बाज़ार , यूरोपियन बाज़ार और उत्तरी अमिरीकी बाज़ार |
Stock exchange in India

भारतीय शेयर बाज़ार

भारत में मुख्य दो शेयर विनिमय संस्थाए है, एक है नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) व दूसरा है बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE). इन्ही दो एक्सचेंजो में सर्वाधिक शेयर व्यपार होता है | बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज १८७५ में शुरू हुआ था तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की खोज १९९२ में की गयी थी और उसमे व्यापर १९९४ में प्रराम्भित हुआ था |
BSE और NSE दोनों अलग एक्सचेंजेस है मगर दोनों का कम करने का तरीका, मार्केट अवधि और समजोता पद्धति, इत्यादी एक ही तरह की है | BSE  में लगभग ४७०० कंपनिया सूचीबद्ध है तो उसका प्रतिद्वंद्वी NSE में लगभग १२०० कंपनिया मै व्यापार होता है | BSE की मुख्य ५०० कंपनियो में मार्केट का लगभग ९०% पूंजीकरण शामिल है तो बाकि १०% शेयर कम अदयातन मात्रा ( वॉल्यूम) से ट्रेड होते है |
How stock exchange works

शेयर बाज़ारो की कार्यप्रणाली

शेयर बाज़ार में कंपनिया अपने शेयर बेच कर अपना व्यापार बढ़ाने वा आगे ले जाने के लिए पूंजी इकठ्ठी करने का काम करतीं है | अधिकतम कंपनिया यही रास्ता चुनती है औए उनके शेयर प्राथमिक सार्वजानिक प्रस्ताव (IPO ) के द्वारा बाज़ार में सामान्य जनता को बेचती है व उनसे पूंजी एकत्रित करती है | कर्ज लेकर उसपे अधिक ब्याज देने के बजाय कंपनिया के लिए आईपीओ का रास्ता सीधा और सरल होता है | कभी कभी अपना कर्ज कम करने के लिए भी कंपनिया आईपीओ या FPO ( अनुगामी सार्वजनिक प्रस्ताव ) बाजारों में लाती है | जो लोग कम्पनीयों के शेयर खरीदते है वो उस कंपनीके हिस्सेदार बन जाते है | अगर कम्पनी लाभ करती है तो उन्हें लाभांश भी मिलता है व उसके वजह से उनके शेयर के भाव भी बढ़ता है |
एक बार कंपनी लिस्ट हो जाती है तो उसके शेयर्स में व्यपार प्रारभित हो जाता है | मार्केट खुलने और बंद होने के बिच में आप जाहे जितनी बार उसमे खरीद वा बिक्री कर सकते है | मार्केट में व्यापार के लिए ख़रीददार और विक्रेता दो नो की जरुरत होती है | दोनों में जो सहमती से व्यापार होता है उसे “सौदा” कहते है | मार्केट में सौदे लगातर मांग और आपूर्ति के वजह से, मार्केट समाचार और मार्केट की मनोदशा की वजह से अलग अलग भाव पे होते है, उसी वजह से हम शेयर के भावो में चढ़ और उतार महसूस करते है |
शेयर बाज़ार दिन ब दिन आत्याधिक जटिल बनते जा रहे है मगर उनमे व्यापार करना उतनाही सरल होते जा रहा है | सरल शब्दों में शेयर बाज़ार में कंपनी के शेयर्स की खरीद- बिक्री होती है |
History of stock exchange in India

भारतीय शेयर बाज़ार का इतिहास

भारत में प्रथम संघटित शेयर बाज़ार सन १८७५ में मुंबई में शुरू हुआ था जो की एशिया का सबसे पुराना शेयर बाज़ार है | १८९४ में अहमदाबाद मे कपडा मिलो के शेयर ट्रेडिंग के लिए विनिमय केंद शुरू किया गया | १९०८ में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज जुट व संबंधित व्यापार के लिए शुरू किया | मद्रास स्टॉक एक्सचेंज १९२० में स्तापित किया गया | भारत में लगभग २४ स्टॉक एक्सचेंज थे उसमे से २१ क्षेत्रीय व्पापार बढ़ाने के लिए शुरू किये गए | सुधार प्रणाली द्वारा २ मुख्य एक्सचेंज अस्तित्व में आये वो थे नॅशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और ओवर द काउंटर एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (OICEI) जिनमे राष्ट्रव्यापी व्यापार होता है |
स्टॉक एक्सचेंज मुख्यतः गवर्निंग बोर्ड व कार्यकारी मुख्यो द्वारा चलाये व शासित किये जाते है | वित् मंत्रालय उन्हें अधिनियमित और नियंत्रित करता है | सरकार ने अप्रैल १९८८ में सेबी की स्थापना की जो एक मार्केट रेगुलेटर है व शेयर व्यापार उद्योग को अधिनियमित व विकसित करने का भी काम करता है |
Stock market history

शेयर बाजारों का वैश्विक इतिहास

१२वी शताब्दी में फ्रांस में राजाओं के वफादार व्यक्ति कृषि समुदायों के कर्ज का प्रबंधन व नियमन करते थे | यही व्यक्ति कर्ज का व्यापार स्वरुप लेनदेन की करते थे तो इस प्रकार वे दुनिया के प्रथम दलाल कहलाते हे |
एक आख्यायिका ये भी के बेल्जियम के ब्रुज शहर में कमोडिटी व्यापारी इक व्यक्ति जिसका नाम वैन डे बुर्जे था उसके घर में मीटिंग के लिए इकठा होते थे जो जगह १४०९ में “बुर्जे बौर्से “ के नामसे जानी गयी | उसके बाद इसी तरह की मीटिंग बेल्जियम के अन्तवेर्प शहर में हुई जहा उस वक्त के सबसे ज्यादा व्यापारी रहा करते थे और वो जगह कमोडिटी व्यापार करने की जगह बन गयी | यह खबर आसपास के शहरों व राज्यों में फ़ैल गयी व इसी तरह बेउर्जें की स्थापना हुई |
13 वी शताब्दी में वैटिकन बैंकर्स सरकारी सिक्योरिटीज में व्यापार करते थे | १३५१ में सरकार ने सरकारी फंड्स की कीमतों को गिरनेवाली अफवाहों को गैर क़ानूनी घोषित किया | १४ वी शताब्दी में पिसा, जेनोआ, वेरोना और फ्लोरेंस के बैंकर्स ने सरकारी सिक्योरिटीज में ट्रेडिंग सुरु की | ये इस लिए संभव हो पाया क्योकि यह शहर और राज्यो पर राजा का प्रभाव नहीं था, इन्हे जनपरिषद चलते थे | मार्केट में शेयर उतारने वाली सबसी पहेली कंपनिया इटालियन थी | यही परमपरा इंग्लैंड और बाकि देशो में १६ वी सदी तक फ़ैल चुकी थी |
१६०२ में डच ईस्ट इंडिया कंपनी पहेली जॉइंट स्टॉक कंपनी थी जिसने फिक्स कैपिटल शेयर दिए थे उसी वजह से इन शेयर्स में अलग अलग एक्सचेंजों में ट्रेडिंग मुमकिन थी | इसके तुरंत बाद एम्स्टर्डम एक्सचेंज में आप्शन और डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग की सुरुवात हुई | डच ट्रेडर्स ही थे जिन्होंने “ शोर्ट सेलिंग” की इजाद की थी जिसे बाद में १६१० में प्रतिबंधित घोषित कर दिया था | अब दुनिया हर एक विकसित और विकसनशील देशों वास्तव में शेयर मर्केट्स है | दुनिया के सबसे बड़े मार्केट में अमिरीकी शेयर बाज़ार, UK का शेयर बाज़ार, जापान, भारत , चीन , कनाडा और जर्मनी के शेयर बाज़ार शामिल है |
History of the American stock market

अमिरीकी शेयर बाज़ार का इतिहास

अमेरिकन स्टॉक एक्सचेंज ( AMEX ) की शुरुवात सन १८०० में हुई थी | १९२१ थक इस एक्सचेंज को “कर्ब एक्सचेंज” से नाम से भी जाना जाता रहा है | इसका अधिकारिक निर्माण समय १९२१ ही पकड़ा जाता है क्योकि इसी साल इसका स्थान्तरण ट्रिनिटी चर्च के करीब नए आवास में हुआ था | मगर ये आधिकारिक तरह अमिरीकी शेयर बाज़ार १९५३ में ही घोषित हुआ | नोव्हेंबर १९९८ में इस एक्सचेंज का विलय नेशनल एसोसिएशन ऑफ़ सिक्योरिटीज डीलर्स से होकर “नैस्डेक-एमेक्स एक्सचेंज” की सुरुवात हुई |
ऑक्टोबर २००८ में अमिरीकी स्टॉक एक्सचेंज का अधिग्रहण NYSE euronext ने किया | तब से धीरे धीरे एमेक्स का कम और डाटा सब NYSE में परिवर्तित किया गया और एमेक्स को बंद कर दिया गया | जनवरी २००९ से इस एक्सचेंज का अधीकारिक नामकरण NYSE amex हो गया |

ट्रेंड को बनाये अपना मित्र

ट्रेडिंग में ट्रेंड को फ्रेंड बनाये

आप किसी चार्ट के गौर से देखेगे तो आपको उस पर कीमते चोटियों और गर्तो में चलायमान दिखेगी | ये संरचना लाइन चार्ट में स्पष्ट रूप से दिखाई देते है | ये कीमतों की उर्ध्वगति और अधोगति के वजह से रेखांकित होती है | कीमतें ज्यादातर समय ट्रेंड या प्रवृति के साथ चलती है और कभी कभी ये ट्रेंड्स लम्बे समयतक टिकते है |

ट्रेंड को समज़िये

ट्रेंड को समज़िये

ट्रेंड उसकी दिशा और पक्षपात अनुसार ३ होते है | एक है अपट्रेंड जिसमे मार्केट में मांग होने की वजह से कीमतों में उछाल देखा जाता है | उसके बाद में आता है डाउन ट्रेंड जिसमे मार्केट में लगातार आपूर्ति की वजह से कीमतों में गिरावट आती है | कभी कभी कीमतें में मांग की कमी की वजह से भी दबाव रहता है | ट्रेंड का तीसरा प्रकार है , साइड ट्रेंड जिसमे कीमतें एक निर्धारित सीमा के अन्दर कैद होके उपर-निचे होती रहती है | जब मार्केट का मुख्य हिस्सा दुविधा में फ़स जाता है तो यह ट्रेंड का प्रकार चार्ट पर नजर आता है | यही सभी ट्रेंड्स आप एक ही चार्ट में चार्ट की समय सीमा बदल कर देख सकते है |

मासिक या साप्ताहिक चार्ट के ट्रेंडस को मुख्य ट्रेंड्स कहा जाता है | दैनिक चार्ट या फिर इंट्रा डे चार्ट के ट्रेंड दुय्यम स्वरुप के होते है | दुय्यम स्वरुप के ट्रेंड लघु अवधि के ट्रेडर्स या इंट्रा डे ट्रेडर्स के उपयोगी होते है तो मुख्य ट्रेंड निवेशको के लिए महत्वपूर्ण होते है |

ट्रेंड का उपयोग

ट्रेंड का उपयोग

ट्रेंड को पहचानना और उस दिशा में ट्रेड करना ही उचित और फायदेमंद होते है | इसी वजह से ट्रेंड को ट्रेडर्स का मित्र कहा जाता है | जो ट्रेडर्स ट्रेंड के साथ कम करते है वो अन्य ट्रेडर्स के मुकाबले ज्यादा मोटा मुनाफा कमाते है और अच्छी तरह से ट्रेडिंग कर पातें है | अननुभवी ट्रेडर्स ज्यादातर ट्रेंड के विरुद्ध जाते है और ट्रेडिंग में नुकसान करते रहते है | अनुभवहीन ट्रेडर्स साइड वेज़ ट्रेंड में फसकर अपने समय का नुकसान करते है |

नए ट्रेडर्स का दृष्टिकोण हमेशा कम से कम नुकसान का होना चाहिए न की मोटा मुनाफ कमाने वाला क्योकि उनसे अनुभवहीनता के कारण उनसे गलतिया ज्यादा होती है | मार्केट में गलती का मतलब नुकसान ही होता है | ट्रेडर्स के ट्रेडिंग का दृष्टिकोण हमेशा जोखिम-लाभ के मद्दे नजर होना चाहिए ना की मूल्याकन स्वरुप निवेश जो एक गलती है और सामान्यत हर एक ट्रेडर अपने ट्रेडिंग जीवन में यह गलती कभी न कभी करता ही है |

टेक्निकल ट्रेडिंग में अच्छी जोखिम लाभ योजना वाली रणनीति से काम करना होता है जो उसे समय के आगे वाला मुनाफा करवाए और मार्केट को पछाड़े | हर एक ट्रेडर अनोखा होता है क्योकि हर एक की ट्रेडिंग योजना अलग होती है, उसका जोखिम लाभ का अनुपात अद्वितीय होता है |

सफल ट्रेडर

सफल ट्रेडर

एक सफल ट्रेडर्स का ट्रेडिंग मंत्र होता है अनुशाशीत ट्रेडिंग और ट्रेंड की दिशा में ट्रेड करना | इसी लिए सफल ट्रेडर्स ज्यादातर मुनाफा कमाता है और बाकी नुकसान से परेशान रहते है | एक या दो बार कोई भी ट्रेडर सौभाग्यशाली हो सकता है मगर अगर आपको लगातार मुनाफा कमाना है तो आपको ट्रेंड का अनुसरण करने वाला ट्रेडिंग प्लान और कम जोखिम-लाभ रणनिति अपनानि ही होगी |

व्यावासिक ट्रेडर्स का एक पसंदीदा मुहावरा है की “ नुकसान से निकल जाओ और मुनाफे पे बैठो” | यह समज और अनुशासनता अनुभव से ही अवगत होती है और सामान्य ट्रेडर और सफल ट्रेडर के बिच में अंतर बनाये रखती है |

कामयाब निवेशक के लिए टाइमिंग ही सबकुछ होता है | इसी लिए सफल निवेशक हमेशा सस्ते में खरीदना और महंगा बेचना पसंद करते है | व्यावसायिक निवेशक हमेशा अपट्रेंड में खरीदते है और डाउन ट्रेंड में मुनाफा वसूलते रहते है जिससे उनके पूंजी में लगातार वृद्धि होती रहती है |

टेक्निकल एनालिसिस के साथ ट्रेडिंग की यात्रा

बाज़ार में कीमत और उनकी दिशा ये दोनों चीजे बहुत महत्वपूर्ण होती है | एक ट्रेडर का काम उनको देखना, उन्हें पहचानना और इसकी मदत से मुनाफा कमाना यही होना चाहिए | टेक्निकल एनालिसिस का ज्ञान एक ट्रेडर की हमेशा मदत ही करता है |

टेक्निकल एनालिसिस के साथ ट्रेडिंग की यात्रा

चार्ट और ट्रेंड्स

अगर आप टेक्निकल एनालिसिस को सिखा है तो आप औरो के मुकाबले चार्ट पर ट्रेंड आसानी से ढूंड सकते हो औए पहचान सकते हो | अगर आप मार्केट में नए हो तो आपको पहले कीमतों का चार्तोके बारे में सिखाना चाहिए | चार्टो की कीमत चित्रकारिता नुसार विविध प्रकार है मगर कैंडलस्टिक , बार और लाइन चार्ट के प्रकार सामान्य रूप से उपयोग में लाये जाते है | व्यवसायिक ट्रेडर्स कैंडल स्टिक चार्ट का ज्यादातर उपयोग करते है और उसकी मदत से मुनाफेवाले कीमतों के पैटर्न आसानी से ढूंडे जा सकते है |

 

बार चार्ट भी कैंडल स्टिक चार्ट की तरह ही होता है मगर ये चार्ट आलेखन करने की पद्धति बहुत पुरानी है और आज कुछ गिने चुने ट्रेडर्स ही उनका उपयोग करते है | लाइन चार्ट सबसे सामान्य चार्टिंग पद्धति है और आपने कही बार आपके टीवी स्र्क्रीन पे या एक्सचेंज के वेबसाइट पर यह चार्ट देखे होंगे |

चार्ट और ट्रेंड्स

टेक्निकल ट्रेडिंग में काम

टेक्निकल ट्रेडिंग में एक ट्रेडर उदेश्य हमेशा ट्रेंड को पहचानना , ट्रेंड के साथ ट्रेड करना और बाज़ार में से मुनाफे को घर लाना यही होता है | डाउन ट्रेंड वाले चार्ट पर ट्रेडर्स को दिशा बदल के संकेतो के लिए प्रतीक्षा करनी होती है और वो दिखाते ही ट्रेडर्स को ख़रीददार होना होता है | ट्रेंड का बदलाव ये एक बहुत महत्त्वपूर्ण और मुख्य घटना होती है , और इसे भुनाना ट्रेडर्स के लिए जरुरी होता है | इसी कौशल पर ट्रेडर्स को भविष्य में कितना मुनाफा और कितना घाटा होना है यह भी निर्भर होता है |

 

यह सुनाने में आसान लगता है पर व्यावारिक ट्रेडिंग जीवन में यह काम बहुत मुश्किल होता है | इसके लिए ट्रेडर्स को अनुभव और गंभीर ज्ञान की जरुरत होती है | इसी वजह से अनुभवहीन ट्रेडर्स ज्यतातर असफल होते रहते है और व्यावासिक मुनाफा भुनाते रहते है | इसी वजह से ट्रेडर्स को ट्रेडिंग जीवन की सुरुवात अच्छे मार्केट ज्ञान के साथ पेपर ट्रेडिंग या फिर निवेश के साथ करनी चाहिए |

 

टेक्निकल ट्रेडिंग का सारांश

टेक्निकल ट्रेडिंग का सारांश

चार्ट ये टेक्निकल ट्रेडर का प्ले ग्राउंड होता है | सालो की मेहनत और अनुभव से कुछ बुद्धिजीवी ट्रेडर्स ने चार्ट्स के प्रकार और इंडीकेटर्स का इजाद किया है | जो मार्केट गणित का चित्र स्वरुप रेखांकन होता है जो सामान्य मानवी को समज़ने के लिए आसान होता है |

 

पुराने दिनों में एक चार्टिस्ट को अपने चार्ट खुद हाथ से ग्राफ पेपर पर बनाने पड़ते थे और उसके बाद उनका उपयोग करना पड़ता था , जो थकाऊ और ग़ैरदिलचस्प था | मगर डिजिटल युग की मदत से ये कम अब कंप्यूटर की सहयता से मिनटों में हो जाता है |

 

इसी लिए एक ट्रेडर्स के पास हमेशा एक अच्छा व्यक्तिगत कंप्यूटर और इंटरनेट उपलब्ध होना चाहिए | बहोत सारे चार्टिंग प्लेटफॉर्म्स मुफ्त में उपलब्ध है, जो एक सुरुवाती ट्रेडर्स आसानी से उपयोग में ला सकता है | इसके साथ आप अगर अच्छे से टेक्निकल अनाल्सिस का ज्ञान प्राप्त करते हो तो आपको एक यशस्वी ट्रेडर्स होने से आपको कोई नहीं रोक सकता |

चार्ट के प्रकार (हिंदी)

चार्ट कीमतों को निर्घारित समय सीमा के तहत प्रदर्शित करते है | चार्ट्स मिनटों से लेकर सालो की समय सीमा तक रेखांकित किये जा सकते हैं |
चार्टो के कहीं प्रकार हैं, और साधारणत कीमते y-एक्सिस (खड़ी रेखा) पर रची जाती हैं और समय x-एक्सिस (समांतर रेखा ) पर दिखाया जाता है | तकनीकी संकेतो को कीमत चार्ट के निचे दिखाया जाता हैं |
समयावधि के आधार पर चार्ट समान्यत: ५ मिनिट , १० मिनिट , १५ मिनिट, आधा घंटा , १ घंटा , ४ घंटे , दिवसीय, साप्ताहिक और मासिक इस प्रकार के होते हैं |
सामान्य रूप से, दिवसीय और इंट्रा डे चार्टो का उपयोग छोटी अवधि के मूल्य गति जाचने के लिए होता हैं, बल्कि दीर्घकालिक मूल्याकन के लिए साप्ताहिक व मासिक चार्टो का प्रयोग किया जाता हैं | ५ और १० मिनिट के चार्ट मार्केट स्कैल्पर उपयोग में लाते है , १५ मिनिट के चार्ट डे ट्रेडर और छोटी अवधि के महत्वपूर्ण होते हैं | साप्ताहिक व मासिक चार्ट्स स्विंग ट्रेडर्स और निवेशको के काम आते हैं |
कीमत रचने की शैली के आधार पर चार्टो को लाइन चार्ट, बार चार्ट, कैंडलस्टिक चार्ट और पॉइंट व फिगर चार्ट प्रकार में वर्गीकृत किया जाता हैं | ये मुख्य चार्ट प्रकार है, इसके बावजूत और भी चार्टो के कीमत रेखांकन आधार पर कई प्रकार होते है पर वह कदाचित इस्तेमाल होते है और वो भी विशेषज्ञ ही इस्तेमाल व उपयोग करते हैं | उदारणार्थ रेनको चार्ट, हेइकिन-अशी चार्ट, एकवि-वॉल्यूम चार्ट , कैंडल-वॉल्यूम चार्ट, कागी चार्ट , थ्री लाइन ब्रेक चार्ट, इत्यादी.
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आकृति १ निफ्टी फ्यूचर लाइन चार्ट
लाइन चार्ट ये चार्ट प्रकारों में सबसे सरलतम प्रकार है | लाइन चार्ट में कीमतों को रेखावोसे जोड़कर बनाया जाता है | समान्यतः शेयरों के बंद भाव को इस तरह के चार्ट के रेखाटन के लिए उपयोग में लाया जाता हैं | कभी-कभार शेयरों के उच्तम भाव , निम्नतम भाव और प्रथम भाव ( ओपनिंग प्राइस ) का भी इस्तेमाल किया जाता हैं |
जब सभी मूल्य बिंदुओं को रेखांकित किया जाता है तो वह समय आधारित कीमतों की दिशा को प्रत्याषित करते हैं | पर इस चार्ट के सहायता से ट्रेडिंग करना मुश्किल व नुकसानदायक हो सकता है |
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आकृति २ निफ्टी फ्यूचर बार चार्ट
बार चार्ट शुरुवाती दिनों में बहुत प्रचलित और आम थे | इस चार्ट में एक बार एक समय की मूल्य विस्तार दिखता है | बार चार्ट सामान्यतः दिन, सप्ताह व मासिक कीमतों को समजने के उपयोग में लाये जाते हैं |
बार चार्ट में प्रत्येक बार निर्धारित चार्ट समयानुसार कीमतों की प्रथम (ओपन) , उचतम ,निन्म्तम और बंद भाव दिखाता है | बार का उपरी सीमा शेयरों का दिन का उच्तम भाव प्रदर्शित करती है, निचली सीमा निम्नतम भाव सांकेतिक करती है. शेयर का बंद भाव दायिने और होता है व बाए बाजु ओपनिंग भाव होता है | बार चार्ट पैटर्न के उपयोग से व्यापारी और तांत्रिक विश्लेषक बाज़ार में मुनाफा कमाते है |
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आकृति ३ निफ्टी फ्यूचर कैंडलस्टिक चार्ट
आजकल कैंडलस्टिक चार्ट का उपयोऊ बहोत आम हो गया है व अधिकतम ट्रेडर्स इसी चार्ट प्रकार का उपयोग व्यापर में करते हैं | कैंडलस्टिक चार्ट मुफ्त में अधिकतर चार्टिंग प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध रहते है | कैंडलस्टिक चार्ट बार चार्ट के तरह ही दिखते है फर्क सिर्फ बार की चौड़ाई में होता है | कैंडलस्टिक चार्ट ओपन, उचतम ,निम्नतम , व बंद भाव एक मोमबती के स्वरुप में चार्ट पे दिखता हैं |
कैंडल का कलर उसकी ओपनिंग और क्लोजिंग पैर निर्भर करता है | बंद भाव ओपनिंग के उप्पर है तो उसे पॉजिटिव क्लोसिंग कहते हैं और ये कैंडल हरी या फिर सफ़ेद रंग की दिखाई जाती हैं | इसके उपरांत अगर बंद भाव ओपनिंग के निचे है तो उसे नेगेटिव क्लोजिंग कहते है , इसमें कैंडल लाल या काले रंग में दिखाई जाती है |
इस चार्ट में कीमते मोमबती की तरह दिखती है जिसमे दोनो तरफ बाती रहती है उसे अक्सर कैंडलस्टिक शैडो कहा जाता है | वह कीमतों की चरम गतिविधि ( एक्सट्रीम प्राइस एक्शन ) प्रत्याषित करती है | दोनों शैडो के बिच के भाग को “बॉडी” कहा जाता हैं |
कैंडलस्टिक चार्ट, बार चार्ट के तरह विविध चार्ट पैटर्न निर्माण करते हैं | यह पैटर्न कैंडल के बॉडी और शैडो को मिलकर बनाते हैं | छोटी अवधि के ट्रेडिंग में यह कैंडलस्टिक पैटर्न बहुत लाभदायी होते है | ये पैटर्न अपट्रेंड के ख़त्म होने व डाउन ट्रेंड की समाप्ति की सूचना ट्रेडर्स को देते है और व्यापर को सफल बनाने के बहुत उपयोगी आते है |
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आकृति ४ निफ्टी फ्यूचर पॉइंट व फिगर चार्ट
पॉइंट व फिगर चार्ट्स एक अद्वितीय प्रकार की चार्टिंग प्रणाली है | क्योकि ये चार्ट, अन्य चार्ट के समान कीमतों को समयानुसार रचित नहीं करता है | बल्कि ये चार्ट कीमतों की दिशानुसार कीमते चार्ट पर X व O के रूप में दिखता है | जहा X मतलब कीमतों में वृद्धि और O मतलब कीमतों में गिरावट | नविन X या फिर O कीमतों में ठराविक समय में बदल आने पर ही रचे जाते है | कीमते जब लगातार उपर की और बढाती जाती है तो X अक्षर एक के उपर एक इस तरह से रचा जाता है | गिरती कीमतों में O अक्षर एक के निचे एक इस तरह से रचा जाता है | सामान्यतः ठराविक समय चार्ट में ३ के रूप में इस्तेमाल किया जाता है | यह चार्ट कीमतों की सही दिशा अचूकता से जाचता है और बाज़ार शोर को नज़र अंदाज़ करता हैं |