Hindi -Why technical analysis sometimes work sometime not?

क्यों टेक्निकल एनालिसिस कभी काम करता है और कभी नहीं करता ?

क्यों टेक्निकल एनालिसिस कभी काम करता है और कभी नहीं करता ?

टेक्निकल एनालिसिस क्या है ?

टेक्निकल एनालिसिस में कीमतों का अभ्यास किया जाता है , जो की बाज़ार में लोंगो के मनोदशा और भावनावो का प्रतिनिधित्व स्वरुप है | इसी वजह से टेक्निकल एनालिसिस ज्यादातर बार काम करता है , क्योकि सामान्य रूप से लोग समान परिस्थितियों में एक जैसे निर्णय या फिर गलतिया करते है | जो चार्ट पर समान प्राइस पैटर्न्स या फिर टेक्निकल पैटर्न बनाते रहते है और यह प्रक्रिया बार बार होती रहती है |

कीमतों की दिशा या ट्रेंड्स चार्ट पर मूविंग अवेरेजेस और इंडीकेटर्स की मदत से खोजी जा सकती है | और उनकी हद या फिर सीमा चार्ट पर सपोर्ट और रेजिस्टेंस खीचकर निर्देशित किये जा सकते है | ये एक सीधी और साधा तरीका है मगर इसमें अनुभव जरुरी होता है |

जब कीमते रेजिस्टेंस को लांघकर ट्रेड करने लगाती है तो उसे “बुलिश ब्रेकआउट” कहा जाता है , उसी तरह जब कीमते सपोर्ट क निचे टूट जाती है तो उसे “बिअरिश ब्रेकडाउन” कहा जाता है | ब्रेकआउट की घटना एक ट्रेडर के लिए बहुत महत्व पूर्ण होती है और वो ट्रेडर्स के लिए एक शक्तिशाली हत्यार की तरह काम करता है | ब्रेकआउट कीमतों और इंडीकेटर्स में भी देखा जा सकता है और उपयोगी होता है |

ब्रेकआउट लगभग ८०-९०% समय काम करता है और सही दिशा में ट्रेड करने वालो को मोटा मुनाफा कमाकर देता है | ज्यादातर ब्रेकआउट और ब्रेकडाउन मुख्य दिशा परिवर्तन के समय होता है और ट्रेडर्स को एक मुनाफे वाली रैली मिल जाती है |

कभी कभी टेक्निकल एनालिसिस क्यों काम नहीं करता ?

कभी कभी टेक्निकल एनालिसिस क्यों काम नहीं करता ?

टेक्निकल एनालिसिस कभी कभी किसी ट्रेडर के लिए कम नहीं करता और उसका मुख्य कारण होता है , अनुभव की कमी | जो लोग या ट्रेडर्स मार्केट में नए है वो ज्यादातर पकीमतों को या फिर इंडीकेटर्स को अच्छे से नहीं समज पाते और गलती कर बैठते है | इसी कहते है की लिए एक यशस्वी ट्रेडर्स के पीछे उसके अनुभव का हाथ होता है | ज्यादातर व्यावसायिक और नए ट्रेडर्स एक ही तकनीक अपनाते है मगर व्यवसायिक ट्रेडर मुनाफा कमाता है और उसी तकनीक से नए ट्रेडर्स को नुकसान होता है | यह कही बार देखा गया है |

दूसरा यह की बहुत बार ट्रेडर्स चार्ट्स, प्राइस पैटर्न और इंडीकेटर्स के ऊपर इतना निर्भर हो जाते है की वो मार्केट की परिस्थितियों को जानना और समज़ना भूल जाते , और अपने इस छोटे कोष से बाहर न आने की वजह से गलत साबित होते रहते है |

यही व्यवसायिक ट्रेडर्स मार्केट और उतार-चढाव के हिसाब से अपनी तकनीक और इंडीकेटर्स को ट्यून करते रहते है | जैसे की ज्यादा चढ़ उतार वाले मार्केट में चार्ट पर फाल्स ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन होने पर ट्रेडर्स को मुख्य ट्रेंड के साथ रहना चाहिए | दूसरा उदहारण में बुल मार्केट में कीमते ओवर बाउट स्थिति में हप्ते या फिर महीनो तक ट्रेंड करती है और बीच बिच में गलत सेल सिग्नल निर्माण होते है |

कभी कभी कुछ तकनीक कुछ वक्त तक ही काम करते जाते है क्योकि मुख्य मार्केट मेकर्स वही टेक्निक्स उपयोग में लाते है और उनपर ही उस वक्त भरोसा बैठ होता है , इसे “सेल्फ फुल फिलिंग प्रोफेसी” भी कहा जाता है |

कुछ ट्रेडर्स बहुत सामान्य तकनीक उपयोग करते है और फिर भी मुनाफा कमाते है और कुछ जटिल और महंगी ट्रेडिंग सिस्टम का उपयोग करके भी सदा नुकसान में ही बैठे होते है | ये इस लिए होता है क्योकि व्यावसायिक ट्रेडर्स जो गैर प्रचलित ट्रेडिंग की रणनीति बनाते है वो अनुभव पर आधारित होती है और उसकी मार्केट पर पूरी पकड़ होती है | ट्रेडिंग का मुख्य उद्देश मुनाफा कमाना है न की वैज्ञानिक तरीकेसे सही रहना |

टेक्निकल एनालिसिस की पड़ताल

टेक्निकल एनालिसिस की पड़ताल

टेक्निकल एनालिसिस कीमतों का पूर्वानुमान लगाने का शास्त्र है जो की हर समय १००% काम नहीं करता है मगर इसका अर्थ यह नहीं की ये भरोसा करने के लायक नहीं है | जितने भी पूर्वानुमान लगाने के शास्त्र और व्यवसाय है उनकी खुद की कुछ कमिया हमेशा रहती है मगर इसका ये अर्थ नहीं होता की वे सब बेकार है , जैसे की मौसम अनुमान इत्यादी |

स्टॉक मार्केट में किसी भी विश्लेषनात्मक पद्धति का मूल्य उसकी कामयाबी या फिर मुनाफा बनानेकी शक्ति पर निर्भर होती है | अगर वो पद्धति लगतार मुनाफा बनती हो तो वो वैज्ञानिक दृष्टी से शायद गलत हो मगर ट्रेडर्स के लिए उपयोगी होती है | क्योकि मार्केट से ट्रेडिंग में मार्केट से पैसे बनाना ही उद्देश होता है न की वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सही होना |

 

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बाज़ार में कीमत हमेशा सही होती है

सबकुछ कीमतों के बारे में

सबकुछ कीमतों के बारे में

बाज़ार में कीमते भीड़ तय करती है | खरीददार और बेचनेवाले को बिच के टकराव से कीमते तय होती है और इजाद होती है | कीमतें में बाज़ार की सभी आधारभूत जानकारी , समाचार, और लोंगो की मान्यताये सम्मीलित होती है | इसे सिद्धन्त को “मार्केट डिस्काउंट मैकेनिज्म” के नाम से भी जाना जाता है | जैसे मार्केट में मान्यताये बदलती है या समाचार आते या फिर फंडामेंटल्स बदलते है, हमे कीमतों में तेजी से उतार चढाव देखते है |

आधारभूत जानकारी में सैकड़ो तत्व शामिल होते है जैसे मार्केट या फिर शेयर को तथ्य, बाजार की राय , चरम अनुमान, बाज़ार समाचार और लोगोंकी धारनाये | यह सभी चीजे बाज़ार में आपूर्ति और मांग में बदलाव करती रहती है और उसी वजह से हम हर एक सेकंड में कीमतों में चढाव और उतार देखते है |

डॉव थ्योरी और कीमतों का संबंध

डॉव थ्योरी और कीमतों का संबंध

चार्ल्स डॉव जिन्होंने “द वाल स्ट्रीट जर्नल” की स्थापना की थी, उनके हिसाब से मार्केट में एक ही चीज सच्ची और भरोसे के लायक होती है और वो थी “कीमत” | उनका कहना था की कीमते हमेशा बाज़ार तथ्य, अफवाए, बाज़ार का शोर होते हुए भी कीमते अपनी दिशा में यात्रा करती रहती है | और मेरे हिसाब से भी बाज़ार में एक ही चीज जो सामने दिखती है और उसपर भरोसा किया जा सकता है वो है “कीमत” |

चार्ल्स डॉव ने जो मार्केट में निरीक्षण किया था, उन्होंने उन्हें अधोरेखित किया था जिसे आज “डॉव थ्योरी “ के नाम से जाना जाता है |

 

डॉव थ्योरी

1. कीमते हमेशा ट्रेंड में घुमती रहती है |

2. एक ट्रेडर ट्रेंड को देख सकता है और पहचान सकता है | ट्रेंड नियमित रूप से दिखाई देते है और कई बार दोहराए भी जाते है |

3. प्राइमरी ट्रेंड ही मुख्य होते है और सेकेंडरी ट्रेंड्स को रेत्रसमेंट कहा जाता है जो ट्रेड करने के हिसाब से मुश्किल होते है |

4. प्राइमरी ट्रेंड उसकी दिशा में प्रस्तान करता रहता है जब तक बाजार में कोई मुख्य और मौलिक बदल नहीं होता |

कीमत और मूल्य

कीमत और मूल्य

कीमत और मूल्य ये दोनों अलग है | टेक्निकल एनालिसिस की मदत आप कीमतों की सही खोज कर सकते हो और फंडामेंटल एनालिसिस से उनके सही मूल्यों का अभ्यास कर सकते हो | जो शेअर्स की कीमते अपनी मूल्य से ज्यादा कीमत पर ट्रेड होती है, उन शेअर्स को “ओवर वैल्यूड शेअर्स” कहते है | ये उस कंपनी के समृद्ध और संपन्न भविष्य , बाज़ार की अफवाए या फिर ट्रेडर्स की भावनाओं की वजह से होता है |

अगर शेअर्स की कीमत उसकी मूल्य से ज्यादा कीमत पर ट्रेड होती है तो मूल्य और कीमत के अंतर को “प्रीमियम” कहा जाता है | उसी प्रकार अगर शेअर की कीमत उसके मूल्य के निचे ट्रेड होती है तो इस अंतर को “डिस्काउंट” कहा जाता है |

यह प्रीमियम और डिस्काउंट एक निवेशक के लिए हमेशा महत्वपूर्ण होते है | एक होशियार ट्रेडर हमेशा टेक्निकल एनालिसिस और फंडामेंटल एनालिसिस की मदत से अच्छी तरह से ट्रेडिंग करता है और उसके मदत से ही अपनी जोखिम को भापता है और उसका उपयोग दैनदिन ट्रेडिंग में करता है |

चलो इसको एक उदाहरण से समज़ते है | मंदड़ियों के बाजार में ब्लू चिप शेअर्स (मौलिकरूप से मजबूत शेअर्स ) के भाव स्माल और मिडकैप शेअर्स के मुकाबले कम गिरते है यह अपने देखा होगा | मुख्य इंडेक्स शेअर्स में ट्रेडिंग करना अन्य शेअरो के मुकाबले कम जोखिम भरा होता है | क्योकि इन शेअर्स को उनके मौलिक आधारों पे और कम्पनी मैनेजमेंट के गुणवता की आधार पर ही मार्केट रेगुलेटर इंडेक्स में शामिल या फिर बाहर करता है |

टेक्निकल एनालिसिस के साथ फंडामेंटल एनालिसिस का उपयोग एक उत्प्रेरक की तरह काम करता है | उससे एक ट्रेडर को मार्केट को जितने का मोका मिलता है | प्रोफेशनल ट्रेडर्स हमेशा फंडामेंटली शक्तिशाली कंपनियों के शेअर्स में ही ट्रेडिंग करना पसंद करते है | और टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग खरीदने और बेचने के निर्णयो को लेने में उपयोग में लाते है |

कीमते और टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग

कीमते और टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग

टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग ट्रेडिंग कम्युनिटी के लिये नया नहीं है , इसकी शुरुवात सन १८०० में जापान में चावल के व्यापारी भविष्य की कीमतों का अंदाज़ लगाने के लिए निजी तौर पे किया करते थे | टेक्निकल एनालिसिस को ट्रेडिंग की समजवाले बुद्धिमानी लोंगो इजाद किया और उसे विकसत करते रहते है | क्योकि जटिल गणित कोई बच्चो का खेल नहीं है |

टेक्निकल एनालिसिस ये कंप्यूटर , ट्रेडिंग सिस्टम्स और चार्टिंग सॉफ्टवेयर के इजाद के पहले से ही मौजूद है और नियमित उपयोग में लाया गया है | ये दुनिया में लगभग २०० से ज्यादा साल जी चूका है और आगे भी भविष्य में उपयोग में लाया जायेगा और विकसित होता रहेगा | हर साल नए अवधारणाये, इंडीकेटर्स , चार्टिंग स्टाइल इ. खोजे जाते है और ट्रेडर्स उनका उपयोग करते है और खुद को और बेहतर बनाते जाते है |

Why technical analysis works

Why technical analysis works and sometimes not works

What is technical analysis

What is technical analysis?

Technical analysis is nothing but study of psychological and emotions representations of crowd behavior in the form of prices. And that why technical analysis work most of the time, because peoples make same decisions, mistakes or actions under similar conditions and which gives same price patterns or technical patterns on charts over and over again.

 

Trend can be recognized on charts with the help of moving averages and indicators. While limit of the trends can be analyzed by straight and simple method of plotting support and resistances on charts.

 

When prices move above resistances then it is called as bullish breakouts and when they breach support zones then it is called as bearish breakdown. Breakout or breakdown is powerful tool for traders and works on prices as well as indicators. By historical experience, breakout works 80-90% of times and gives smart profits to traders. Breakout and breakdown many time occurs at reversal and gives smart profitable rallies to traders.

technical analysis does not works

Why technical analysis does not works?

Sometimes, technical analysis does not works due to lack of experience. That mostly happens with amateur traders. That why experience always count in successful trading. Sometimes Amateurs and professional uses same technical studies but get different results.

Secondly, technical analysis sometimes fails for the reason that traders too much count on indicators and prices patterns and does not see physical market reality out of their cocoon.

 

Professional traders knows well that not every technique will work all the time. They tune them with market conditions and volatility. For example, you can see many false breakout or breakdown during volatile markets but that time you have to stick with primary trends. In bull market prices tend to trend or rally upside in overbought conditions for weeks to months and gives false sell signal as every retracement.

Sometimes some techniques works when major market participant uses same technique and believes it will work, this is also called as “self-full filing prophecy”.

 

Some technical traders use out of the line technical strategies and still succeed. Because these custom made strategies have grip on market and that why they works. In trading only one thing is important and that is making money not to remain scientifically correct.

Discovering technical analysis

Technical analysis is price forecasting technique and it does not works 100% every time. But that does not means it is not reliable. All forecasting businesses has there drawbacks that does means they can’t work or we cannot rely on them, like meteorology.

 

In financial markets, value of an analytical method is determined by whether it make money or not in long run. If it is then it might be scientifically wrong but technical traders still use them. Because at last our goal is making money not getting always scientifically correct.

The price is right

The price is right

It is all about price

Price is the product of collect effect of market crowd. Buyers and sellers tussle discover prices. Prices always include all underlying information, news and people’s assumptions. This is also called as stock market discount mechanism. As assumptions changes or news flow continues or fundamental changes we see rapid rise or fall in prices.

All underlying information consist of hundreds of factors like market or stock facts, market opinions, wild guesses and trading emotions. All these factors changes supply demand equations every second that why new prices are discovered literally every second.

Dow Theory

Dow Theory and price

Charles Dow one of the founder of  “the wall street journal”  stated that in market only one thing is true and that is “price”, because prices always effortlessly concluded their journey, regardless of underlying facts, rumors and market noises. In my view, Price is the only information a traders can trust.

Some of the Dow observations also called as “dow theory” are

1. Prices most of the time moves in trends.

2. Trend can recognized and they appear regularly and repetitively.

3. Primary trend and major trend while secondary trend are called retracement and not easy to trade with.

4. Trend likely to continue until something major fundamental change occurs.

Price and value

Price and value

Price and value are to different things. Technical analysis shows and discovers prices while fundamental analysis can judge value. Stock trading above it value called as overvalued this might be due to companies prosper future, market rumors or due to news based emotions. Difference between real value and price called as “premium”. Vice versa is true for stock is trading below value. Here the difference is called as “discount”.

These premium and discount always matter to long term investors. While some smart traders use both technical analysis and fundamental analysis to trade better and also to control risk.

For example, in bear market, blue chips (fundamentally strong stock) didn’t fall that much as compared to midcaps and small cap companies stocks.

Trading in major index stocks is comparatively less risky than other. Major index stocks are always included or excluded on their major fundamentals and company management quality by market regulators.

Using fundamental analysis along with technical analysis is like catalyst. It only increases your chances of winning. Professional traders always choose fundamentally sound or highest quality stocks to trade. And use technical analysis to make their buy or sell decisions.

Price and technical analysis

Price and technical analysis

Technical ideas are not new to the world, you can fetch them as back as 1800 century to rice traders in japan. Technical analysis used and developed by many brainy peoples around the world, because you know mathematics is not a game for fools.

Technical analysis was there way before computer, trading systems and charting software’s. It is not a cult because it is survived almost 200 years and will continue to help traders in future. New ideas, indicators, charting style adds every years and make traders knowledge better and better.

Making the Trend Your Friend

If you see a chart, you can see peaks and troughs or in simple words pointed mountains and deep channels. It is clearly visible on line charts. These are nothing but prices moving up and downtrends. Most of the time prices moves in trend and trend sometime last long period of time.

Understanding trend

Understanding trend

A trend has three direction depending upon there bias. One is uptrend in which there is demand in the market and prices start moving upwards because of that. After that comes downtrend which result due to continues selling or lack of buying in the market. And when prices start to trade in range it called as sideways trend, this happens when majority of the crowd is undecided. You can see different trend of same stock changing chart timeframe, and there significance changes with timeframes.

 

Monthly or weekly chart price trend often called as primary trend, daily or weekly chart price trend comes as secondary trends while intraday to daily price trend as tertiary trend or near term trends and only important for day traders.

Using trend

Using trend

Identifying trend and riding on them is best way of making profit out of the market. That why there is saying that “trend is your friend”. If you go with trend then there are more chances of making big money than going against the trend or entering in sideways trend. Amateurs always try to avoid going against the trend or entering in sideway trends because most of the time it cost them time as well money.

 

Each and every technical trader’s job should be preventing and controlling their losses than absolute profit hunting. Technical traders approach to every trade should be more risk-reward based than like value investing.

 

Technical trading means to trade with a plan that is comes with managed risk and potential gains ahead of time. That why each individual is unique and has its own trading plan which match with his trading style and risk appetite.

Successful traders

Successful traders

If traders start trend following with discipline trading then it surely reflect in you trading account. Because anybody can get lucky once but to make consistent profit you must have trend-following plan with controlled risks.

 

Expert traders known expression is that “cut out the losers and run the winners”. This comes with experience and make difference between regular trader and successful trader.

 

For investors, good timing means everything. That why they always try to find bottom for best long entry or top for best short sell. Professional investors always follows buy and accumulate in uptrend and sell on rise in downtrend for capital growth.

Dilemma of using technical analysis

Dilemma

We already saw technical analysis means study of stock prices and how they behave on supply and on demand. Using this information to make money out of the market while keeping losses at its minimum.

 

Using technical analysis in your active trading life is formula of finding profitable opportunities. As I already stated, trading is game of finding right opportunity at right time. Trader’s basic goal is to analyze price trend and then forecast its future price in given horizon for the purpose of buying or selling it to make cash profit out of it.

Technical analysis is a most important tool for active traders and it helps each and every second to thousands of traders all over the world to make their decisions. But it is as important as to a passive investors also.

 

There is always dilemma of using technical analysis for investing. But in my view it will work same for investors as it works for traders, only difference is there holding period.

Because traders hold stocks for short period of time ranging from minutes to days while most major investors hold stocks for months to forever.

 

Technically speaking, there is thin line between trader and investor and because an active traders can be passive investor in any stock depending on major trend or an investors can become trader if its target get achieved in short period of time. In my view, it is not important that you are trader or investors, as long as you are managing your risk right and making money out of the market.

Dilemma of using technical analysis

Most amateurs stick to traders or investors dilemma and forget about main goal of trading or investing which is making money.

 

Technical analysis can be used for 1 hour trade as well as 10 year long term investment. For traders, it help to find best opportunities for short term right entry and exit to make quick bucks. While investors can analyze primary trend to enter at bottom and almost exit at top and also can use pull back to add more and extreme highs to book partial profit out of investment. Sudden crash that falter primary trend of stock can be identified with the help of technical analysis and help the investors to get out of the stock.

Technical analysis is a tool to always help investors to identify these situation and can be actively used by passive investors to get help in their investments. Technical analysis also can help in diversifying your investment as it finds better and better opportunities in market and help you to rotate or allocate your capital to several stocks or sectors to beat the market with highest gains.

 

Same can be true for active traders finding 1 hour highly successful trade and pulling money out of the market.

So at the end, I can suggest there is no dilemma in using technical analysis in trading or investment horizons as long as you are clear about your goals.

तांत्रिकी विश्लेषण टूलबॉक्स

Technical analysis introduction

तांत्रिकी विश्लेषण परिचय

तांत्रिकी विश्लेषण एक स्टॉक मार्केट में कीमतों परखने और उनकी भविष्यवाणी करने की पद्धति है जिसकी मदत से ट्रेडर अपने ट्रेडिंग और निवेश संबंधी फैसले ले सकते है | तांत्रिकी विश्लेषण मतलब सिर्फ चार्ट पढना, संकेतोको विश्लेषण करना और चार्ट पैटर्न्स का परिक्षण करना इतना ही न होकर ये जोखिम प्रबंधन और इन सभी के मदत से फायदा कमाने के काम में भी आता है |

 

अगर आप मार्केट में मुनाफा कमाना चाहते हो तो आपको तांत्रिकी विश्लेषण पद्धति का उपयोग एक परियोजना की तरह करना होगा जिससे आप अनुमानित जोखिम ले सके और अच्छे तरिकिसे ट्रेडिंग कर सके. क्योकि अंत में आप कितना मुनाफा कमाते हो ये सबसे जरूरी भाग होता है न की आप कितनी अच्छी तरह से चार्ट पढ़ते हो या चार्ट पैटर्न कितने अच्छे से पहचानते हो फिर संकेतो को जानते हो | ट्रेडिंग व्यापर का मुख्य काम मुनाफा बनाना है ना की चार्ट पढ़ना , संकेतो को पहचाना और प्राइस पैटर्न का सही होना | ये दोनों अलग चीजे है मगर ये एक दुसरे के बजाय मुमकिन नहीं हो सकती |

 

Technical traders

तांत्रिकी व्यापारी

तांत्रिकी विश्लेषण में ट्रेडर कीमतों को देखना , उनको मापना और वो किस दिशा में जा रही है ये सब चाहता है | कीमतों की दिशा और दशा ये भीड़ की मनोदशा का परिणाम होता है | इस पद्धति का यही काम है की कीमतों को देखना , उससे जोखिम का पता लगाना और पिछली कीमतों के नियमित-अनियमित स्वरुप से भविष्य की कीमतों का पूर्वकथन करना |

 

व्यावहारिक ट्रेडिंग में समय को सबसे ज्यादा महत्व है | सही समय पर ट्रेड में प्रवेश और निर्गम तय करता है की आपको कितना मुनाफा होनेवाला है | ट्रेडिंग ये समय , विश्लेषण और अनुभव का व्यवसाय है और आपकी सफलता इन्ही तिन चीजों पर निर्भर करती है | जिसने इन तिन कला को अवगत कर लिया उसे सफल व्यापारी होने से कोई नहीं रोक सकता |

 

Technical analysis wisdom

तांत्रिकी विश्लेषण बुद्धिमत्ता

आजकल तांत्रिकी विश्लेषण एक व्यापारी की ट्रेडिंग जीवन में या फिर ट्रेडिंग फैसलों में किसी न किसी तरह शामिल होता है और उसकी सफलता की संभावनो को बढ़ता है | क्योकि अलग अलग व्यापारी एक ही समय कीमतों का अनुमान और सामान्य संकेतो का इस्तेमाल करते है जिससे कीमतों को दिशा और गति मिलने में मदत होती है |

 

अगर आपको एक सफल तांत्रिकी व्यापारी बनाना है तो आपको ट्रेडिंग करते समय स्वतंत्र सोच रखनी होगी , हर एक कृति का उतरदायित्व लेना होगा और ज्ञान को अपनाना होगा न की मन की सोच को | एक सफल तांत्रिकी व्यापरी हमेशा नुकसानदायक ट्रेड्स को कम करता है और मुनाफेवाले ट्रेड को बढ़ता और लक्ष्य तक हात में रखता है | नए और अननुभवी व्यापारी इसके उलट करते है और व्यापर जीवन में यैसी जगह पहुच जाते है जहा उनको नहीं जाना था |

 

अच्छे तांत्रिकी विश्लेषण से मार्केट को पछाड़ना हमेशा आनंददायी और इनाम स्वरुप होता है और व्यापारी का आत्मविश्वास बढ़ाने में मदत करता है | मार्केट नहीं जानता की आप कोण हो या फिर या फिर क्या करते हो , वो सिर्फ अच्छे और बुरे ट्रेडर्स को जानता है और उन्हें इनाम या नुकसान देने का काम करता है | अगर आपको हारे हुये व्यापारियों के पंक्ति में नहीं बैठना है तो आज से ही तांत्रिकी विश्लेषण के टूलबॉक्स का इस्तेमाल करना सिखाना होगा और अपने ट्रेडिंग जीवन को समृद्ध और सफल बनाना होगा |

Technical analysis toolbox

Technical analysis introduction

Technical analysis introduction

Technical analysis is a price prediction method that will help traders to make their trading as well as investing decisions. Technical analysis not only associated with reading charts, analyzing indicators and testing price patterns but also managing risk and making profit out of it.

 

If you are want to be a professional traders then use technical analysis system as a project to build calculated risk and better trading practices. At the end it not about reading chart, getting right price pattern or indicators but it is all about making money. Both part are way different but they cannot functions one without others.

Technical traders

Technical traders

In technical analysis, traders look and analyze what prices are doing. Price patterns are nothing but outcome of crowd psychology. Technical analysis is all about observing prices, calculating risk and estimating future prices with help of previous price regularities or irregularities.

 

In practical trading, timing is everything. Good timing means good entry and good exit which makes profit. Trading is nothing but profession of timing, analysis and experience. Right amount of these make a successful traders.

 

Technical analysis wisdom

Technical analysis wisdom

Now a days, most of the traders uses technical analysis one way other and that also help to increase it probability success. As major crowd find same price pattern bullish it will drive prices upside with great momentum.

 

If you want to become technical trader then must think independently, always take responsibility of you trading actions and act fast on observation not on wisdom. Secrete to successful technical trader is to cut losing traders early and sit on profit making trade till targets. Most news comers or amateur traders do exact opposite of this and end at a situation they never wanted to be.

 

Beating the market with good technical analysis is fun and rewarding. Market do not know who you are or what you do, it reward smart traders while wipe out others. If you don’t want to be other then start using technical analysis as you weapon toolbox and have prosper trading future.

टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग निवेशक करे या ना करे

 

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टेक्निकल एनालिसिस एक साधन

हमने देखा है की कैसे टेक्निकल एनालिसिस ट्रेडर्स को शेअर्स की कीमते समज़ने का मोका देता है और मार्केट में मांग और आपूर्ति का अभ्यास करता है | एक अनुभवी ट्रेडर इस जानकारी का उपयोग करके मार्केट में मुनाफा कमा सकता है और इसी की मदत से अपना जोखिम कम करने की कोशिश करता है |

 

टेक्निकल एनालिसिस का आपके क्रियात्मक ट्रेडिंग जीवन में उपयोग करना एक यशस्वी ट्रेडर्स का लाइफ मंत्रा होता है | मैंने पहले भी कहा है की ट्रेडिंग एक सही समय पर सही जगह होकर सही चीज़ खरदीने का खेल है | ट्रेडिंग में समय सुचकता ही सबकुछ है | एक ट्रेडर्स का कम है की कीमतों अभ्यास करे और उससे भविष्य की कीमतों का अनुमान निकले और इस जानकारी का उपयोग करके बाज़ार में खरीदी या बेचकर मुनाफा कमाए |

टेक्निकल एनालिसिस ये एक ट्रेडर्स का महत्वपूर्ण साधन है जो हर एक पल हजारो ट्रेडर्स को उनका खरीदने या फिर बेचने का फैसला लेने में मदत करता रहता है | यह सिर्फ ट्रेडर्स ही नहीं निवेशको भी उसी तरह मदतपूर्ण होता है |

इतिहास में हमेशा ये दुविधा रही है के टेक्निकल एनालिसिस एक निवेशक के काम करता है की नहीं | मगर में अनुभव के साथ कह सकता हू के टेक्निकल एनालिसिस स्टडी एक निवेशक के उसी प्रकार मदत करती है जिस प्रकार ट्रेडर्स को होती है | दोनों में अंतर सिर्फ होल्डिंग समय का होता है |

 

क्योकि ट्रेडर्स की शेअर्स होल्डिंग की अवधि अल्प होती है तो एक निवेशक महीने या सालो तक निवेशित रह सकता है | मेरे हिसाब से एक ट्रेडर और निवेशक में ज्यादा अंतर नहीं होता | एक ट्रेडर्स एक निवेशक भी सकता अगर शेअर्स का मुख्य ट्रेंड स्ट्रोंग बुलिश हो | या फिर एक निवेशक एक ट्रेडर में तपदिल हो जाता है अगर उसका टारगेट अल्पावधि में ही पूरा हो जाता है तो |

मेरे विचार से आप एक निवेशक है या फिर ट्रेडर्स ये मायने नहीं रखता जब तक आप मुनाफा कमाते रहे और अपना जोखिम अच्छे से संभालते रहे |

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ट्रेडर्स या निवेशक दुविधा

 

सुरवात में अनुभवहीन ट्रेडर्स इसी दुविधा में फसे रहते की में एक ट्रेडर्स बनू या फिर या एक निवेशक और उनका मार्केट में आने मुख्य उदेश्श भूल जाते जो है मुनाफा कमाना या फिर पूंजी को बढ़ाना |

टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग एक ट्रेडर १ घंटे के ट्रेड के लिए कर सकता है या फिर एक निवेशक १० साल की निवेश के लिए भी कर सकता है | एक ट्रेडर्स को टेक्निकल एनालिसिस स्टडी छोटी अवधि के ट्रेडिंग के मोके धुंडने में मदत करता है और कम अवधि में मुनाफा कमाने का मदत करता है तो एक निवेशक को बॉटम में निवेशित होने का और टॉप पर निकालने का मोक़ा बताता है | टेक्निकल स्टडीज के द्वारे निवेशक अपने मुनाफे वाले पोजीशन में संचय करने का और थोडा थोडा मुनाफा वसूलने का भी रास्ता अपना सकता है | अगर किसी शेअर्स मुख्य ट्रेंड अगर ख़राब हो जाता है तो ये भी टेक्निकल एनालिसिस के मदत से जल्दी समाज में आता है और निवेशक उस शेअर्स से जल्दी निकलकर अपना मुनाफा बचा सकता अहि या फिर नुकसान को कम कर सकता है |

 

इसी लिए टेक्निकल एनालिसिस को एक हत्यार की तरह उपयोग में लाके ऐसी परिस्तिथियो में ट्रेडर्स या फिर निवेशक अच्छे फैसले कर कम नुकसान या फिर मुनाफा लेकर निकल सकता है | इसी तरह टेक्निकल एनालिसिस अलग लग शेअर्स और सेक्टर्स को जाच कर उनमे कितने मौके है ये भी ट्रेडर्स और निवेशको दर्शता है और आपकी पूंजी को अलग अलग जगह लगने और घुमाने में मदत करता है | इन सब चीजों से ही एक ट्रेडर या फिर निवेशक मार्केट को पछाड़ सकता है | ये चीजे एक ट्रेडर को भी उसी तरह से लागु होती जैसे एक निवेशकको |

 

आखिर में सारांश में ये कह सकते है की आप एक ट्रेडर्स हो या एक निवेशक उससे कई फर्क नहीं पड़ता | इसमें दुविधा नहीं होनी चाहिए की कोण टेक्निकल एनालिसिस उपयोग कर सकता है | आप अपना गोल पूरा करने में या फिर मार्केट हो पछाड़ने में टेक्निकल एनालिसिस के ब्रांचो का बखुबिसे उपयोग कर सकते है |

शेअर बाजारांचा इतिहास

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स्टॉक मार्केट ची व्याख्या

स्टॉक मार्केट वा इक्विटी मार्केट अथवा शेयर बाजार हि एक संस्थेप्रमाणे काम करते जेथे खरीददार आणि विक्रेता कंपनीच्या शेअर अथवा समभागांची आणि इतर आर्थिक साधनांची घेवाण-देवाण करतात. भूतकाळात शेअर्स हे भौतिक सर्टिफिकेटच्या स्वरुपात खरीदी-विक्री होत पण आता डीजीटल युगात हे सर्व काम शेअर बाजारात आभासी स्वरुपात आभासी मंचावर होते. आज पण वास्तविक स्वरुपात शेअर्स ची देवाण-घेवाण होते परंतु ते आता फक्त मोठ्या आर्थिक संस्था , निवेश बँका आणि मोठे व्यापारीच करतात.

२०१२ संपता संपता जागतिक शेअर बाजाराचे एकूण भांडवल हे जवळपास ५५ लाख अब्ज डॉलर ऐवडे होते. त्यामध्ये अमिरीकन शेअर बाजाराचा ३४% हिस्सा होता तर जपान आणि इंग्लंडच्या बाजाराचा ६% सहभाग होता. जगामध्ये जवळपास ६० शेअर बाजार आहेत आणि त्याचे भांडवल एकत्र केले तर ते जवळपास ६९ लाख अब्ज डॉलर इतके भरेल. त्यातल्या १६ शेअर बाजारांचे भांडवल हे १ लाख अब्ज डॉलर पेक्षा जास्त आहे आणि ते जवळपास विश्व बाजाराचा ८७% हिस्सा व्यापतात. हे मुख्य शेअर बाजार ३ खंडानुसार विभागले गेले असून, आणि ते आहेत आशियायी, युरोपिअन आणि अमिरीकन शेअर बाजार.

Stock exchange in India

भारतीय शेअर बाजार

भारतात मुख्यतः २ शेअर विनिमय संस्था आहेत. त्या म्हणजे NSE ( नॅशनल स्टॉक एक्स्चेंज ) आणि BSE ( बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ). ह्याच दोन एक्सचेंजवर सर्वाधिक ट्रेडिंग होते. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज हे १८७५ मध्ये कार्यान्वित झाले तर नॅशनल स्टॉक एक्स्चेंज हे १९९२ मध्ये स्थापन झाले व १९९४ ला त्यामध्ये ट्रेडिंगला सुरुवात झाली.

bse आणि nse दोन्ही वेग-वेगळे एक्सचेंजेस आहेत पण त्याची कार्यपद्धती, कार्य वेळ, सेटलमेंट पद्धत इत्यादी सर्व जवळपास सारखे आहेत. BSE अंदाजे ४७०० कंपन्या लिस्टेड आहेत तर हा आकडा NSE साठी १२०० च्या वर आहे. BSE च्या मुख्य ५०० कंपन्या बाजाराचा ९०% भांडवल भाग गृहीत करतात बाकी १०% शेअर्स हे कमी संख्येने ट्रेड होतात.

How stock exchange works

शेअर बाजारची कार्यप्रणाली

शेअर बाजारात कंपन्या आप-आपले समभाग वा शेअर्स विकून भांडवल उभे करतात. या भांडवलचा उपयोग ते व्यवसाय वाढवण्यासाठी अथवा कर्ज कमी करण्यासाठी करतात. अधिकतम कंपन्या भांडवल उभारण्याचा हाच रस्ता निवडतात आणि प्राथमिक सार्वजानिक प्रस्तावाद्वारे ( IPO ) ते त्यांचे शेअर्स मार्केट मध्ये सामन्य नागरिकांना विकून पैसा गोळा करतात. कारण कर्ज घेवून त्यावर अधिक व्याज भरण्यापेक्षा कंपन्या कंपनीतील काही हिस्सा विकून पैसा गोळा करून त्याचा आधीचे कर्ज कामीकरण्यासाठी अथवा व्यवसाय विस्तारासाठी उपयोग करतात. हा रस्ता त्यांचासाठी साधा आणि सरळ असतो. कधी कधी कंपन्या अधिकचे कर्ज कमी करण्यासाठी FPO ( पुढील सार्वजनिक प्रस्ताव ) बाजारात आणतात. जे लोग कंपन्याचे शेअर्स खरीदी करतात ते त्या कंपनीचे त्या प्रमाणात भागीदार बनतात. जर कंपनीला नफा झाला तर कंपनी त्यांना तो नफा लाभांश स्वरुपात वाटते. कंपनीचा नफा वाढत राहिला वा कंपनी चा चांगल्या प्रकारे व्यवसाय करत असेल तर कंपनीच्या शेअर्स ची मागणी वाढून त्यांचा भाव वधारतो.

IPO द्वारा कंपनी शेअर बाजारात लिस्ट वा सामील होते आणि त्यानंतर तिच्या शेअर्स मध्ये ट्रेडिंगला सुरुवात होते. बाजार वेळेत एखादी व्यक्ती कितीही वेळेस ह्या शेअर्स मध्ये खरीदी अथवा विक्री करू शकते. बाजारात ट्रेडिंग घडून येण्यासाठी खरीददार आणि विक्रेता ह्या दोघांची गरज असते त्याशिवाय सौदा घडून येवूच शकत नाही. दोघांमध्ये ज्या भावात ट्रेडिंग घडून येते त्याला “ सौदा ” असे म्हणतात. मार्केट मध्ये सौदे हे लगातार वेगवेगळ्या भावाला पडत असतात त्यचे कारण म्हणजे मागणी आणि पुरवठा यातील असमतोल, बाजाराला प्रभावित करणाऱ्या बातम्या, बाजाराची दिशा आणि दशा. त्यामुळेच शेअर्स भाव हे कधी वर तर कधी खाली दिसून येतात.

या सर्व गोष्टीमुळे बाजार दिवसेंदिवस अधिक जटील आणि अस्थिर होत आहेत पण टेक्नोलॉजीमुळे ट्रेडिंग हि अधिक सुलभ आणि स्वस्त होत आहे. सरळ शब्दात स्टॉक मार्केट मध्ये शेअर्सची खरीदी आणि विक्री होते.

History of stock exchange in India

भारतीय शेअर बाजाराचा इतिहास

भारतात पहिला संघटीत शेअर बाजार १८७५ मध्ये मुंबईमध्ये स्थापन झाला जो कि आशियातील सर्वात जुना बाजार आहे. १८९४ मध्ये कापड मिलच्या शेअर ट्रेडिंग साठी अहमदाबाद शेअर एक्सचेंज ची सुरुवात करण्यात आली. १९०८मध्ये कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज ची स्थापना जूट अंड संबधित गोष्टीच्या कंपनीच्या शेअर ट्रेडिंग साठी सुरुवात करण्यात आली. मद्रास स्टॉक एक्सचेंज ची स्थापना १९२० मध्ये झाली. भारतात जवळपास २४ स्टॉक एक्सचेंज होते आणि त्यापैकी २१ स्टॉक एक्सचेंजची स्थापना प्रादेशिक उद्योग धंद्यांना चालना मिळावी यासाठी करण्यात आली. सुधारणा प्रणालीतून २ मुख्य एक्सचेंज अस्तितवात आले ते म्हणजे नॅशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) आणि ओवर द काउंटर एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (OICEI) ज्याचे काम आणि प्रसार हा राष्ट्रव्यापी आहे.

स्टॉक एक्सचेंज हे गवर्निंग बोर्ड व कार्यकारी मुख्य अधिकारी चालवतात व नियंत्रित करतात. वित्त मंत्रालय ह्या दोघांना अधिनियमित आणि नियंत्रित करते. सेबी ची स्थापना १९८८मध्ये सरकारतर्फे करण्यात आली जी कि एक मार्केट रेगुलेटर व आर्थिक व्यापार संबंधी उद्योग व संस्था नियंत्रित व अधिनियमित करण्याचे काम करते.

Stock market history

शेअर बाजारांचा वैश्विक इतिहास

१२व्या शतकात राजाचे मंत्री व अधिकारी हे शेतकऱ्यांना कर्ज वाटप आणि त्यांचे नियमन करीत असत. ह्या व्यक्ती हे करत असताना ह्या कामच्या बदल्यात फी आकारात आणि त्यामुळेच यांना जगातील “प्रथम दलाल” संबोधले जाते.

एक आख्यायिका अशी पण आहे कि बेल्जियम देशाच्या ब्रुज शहरात कमोडिटी ट्रेडर्स वैन डे बुर्जे ह्याच्या घरी मिटिंग करण्यासाठी जमा होत आणि त्यातूनच १४०९मध्ये “ बुर्जे बौर्से ” ह्या जागेची स्थापना झाली. ह्याच प्रकारची मीटिंग हीच व्यक्ती बेल्जियम च्या अन्तवेर्प शहरात घडवून आणत जे कि त्यावेळचे सर्वाधिक व्यापारी व व्यापार असलेले शहर होते. त्यातूनच हि जागा कमोडीटी ट्रेडिंग करण्याची जागा बनून राहिली. हि बातमी आजूबाजूच्या शहरात व राज्यात पसरून त्याठिकाणी सुद्धा अशी केंद्रे सुरु झाली ज्यांना “बेउर्जें” म्हणत.

१३व्या शतकात वैटिकन बँक अधिकारी सरकारी सिक्योरिटीज मध्ये ट्रेडिंग करायचे. १३५१ मध्ये सरकारने काही जणांवर बंदी लादली कारण ते अफवा पसरवून सरकारी फंड्स ची किमत कमी करण्याचे षड्यंत्र करत होते. हे बघून १४व्या शतकात इतर शहरे जसे कि पिसा , जेनोआ, वेरोना व फ्लोरेंस यांनी सुद्धा सरकारी सिक्योरिटीज मध्ये ट्रेडिंग ची सुरुवात केली. हे यामुळे शक्य झाले कारण ह्या शहरांवर व राज्यांवर राजाचा हुकुम नव्हता तर ती जनपरिषद मार्फत चालवली जायची. मार्केट मध्ये शेअर्स उतरवणारी पहेली कंपनी हि इटालीयन होती. हीच परम्परा इंग्लंड व आजूबाजूच्या देशात १६व्या शतकापर्यंत पोहचली.

१६०२ मध्ये डच इस्ट इंडिया कंपनी जी कि एक जॉइंट स्टॉक कंपनी होती व जिने फिक्स कैपिटल शेयर मार्केट मध्ये उतरवले होते, त्यामुळेच ह्या कंपनीचे शेअर्स विविध एक्सचेंजावर एकाच वेळेस ट्रेड होवू शकत होते. ह्याचमुळे एम्स्टर्डम एक्सचेंज वर ऑप्शन आणि इतर डेरीवेटीव ट्रेडिंग ची सुरुवात झाली. डच ट्रेडर्सनी “शोर्ट सेलिंग” ची संकल्पना अस्तीत्वात आणली. आज जगातील प्रत्येक विकसित व विकानसील देशात शेअर बाजाराचे अस्तित्व आहे. जगामध्ये अमेरिका,इंग्लंड, जपान, भारत ,चीन,कॅनडा व जर्मनी चे शेअर बाजार सर्वात मोठे बाजार म्हणून ओळखले जातात.

History of the American stock market

अमिरीकेच्या शेअर बाजाराचा इतिहास

अमेरिकन स्टॉक एक्सचेंज ( AMEX ) ची सुरुवात सन १८०० मध्ये झाली. १९२१ पर्यंत ह्या एक्सचेंज ला “कर्ब एक्सचेंज” म्हणून सुद्धा ओळखले जायचे. ह्या एक्सचेंज आधिकारिक स्थापना १९२१ मध्ये झाली जेव्हा यांचे स्थानातरण ट्रिनिटी चर्च जवळील इमारतीत झाले. पण याची घोषणा १९५३ पर्यंत झाली नव्हती. नोव्हेंबर १९९८ ला ह्या एक्सचेंजचे विलानीकरण होवून “नैस्डेक-एमेक्स एक्सचेंज” ची स्थापना झाली.

ऑक्टोबर २००८ मध्ये अमेरिकन स्टॉक एक्सचेंज चे अधिग्रहण NYSE euronext ने केले. तेव्हापासून हळूहळू सर्व माहिती व कामे NYSE एक्सचेंजवर हलवून AMEX बंद करण्यात आले. जानेवारी २००९मध्ये याचे आधिकारिक नामांकरण NYSE AMEX झालेले आहे.

स्टॉक मार्केट का इतिहास हिंदी में

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स्टॉक मार्केट की व्याख्या

स्टॉक मार्केट व इक्विटी मार्केट अथवा शेयर बाज़ार एक संस्था की तरह होता है जहा ख़रीददार और बिचौलिए शेयर्स व अन्य आर्थिक साधनों की लेंन-देंन करते है | पुराने दिनों में शेयर्स का लेंन देंन भौतिक सर्टिफिकेट के स्वरुप में होता था मगर नयी टेक्नोलॉजी की वजह से वो अब लगभग आभासी मंच से होने लगा है | शेयर ट्रेडिंग वास्तविक स्वरुप में भी होती है मगर वो अब बड़ी आर्थिक संस्थाए, बैंक और बड़े व्यापारी ही करते है |
२०१२ के ख़त्म होते होते , जागतिक शेयर बाज़ार का पूंजीकरण लगभग ५५ लाख अरब था | उसमे अमिरीकी मार्केट का हिस्सा ३४% था, जापान और यूके का सहभाग ६% के करीब था |
विश्व में लगभग ६० शेयर बाज़ार है और उनकी पूंजी एकत्रित की जाये तो वो लगभग ६९ लाख अरब की करीब आएगी. उसमे से प्रमुख १६ बाज़ार का पूंजीकरण १ लाख अरब से जादा है और उनका आरती विश्व बाज़ार में हिस्सा करीब ८७% के करीब है | इन १६ मुख्य बाजारों को तिन खंडो के हिसाब से आक़ा जाता है और वो है आशियाई बाज़ार , यूरोपियन बाज़ार और उत्तरी अमिरीकी बाज़ार |
Stock exchange in India

भारतीय शेयर बाज़ार

भारत में मुख्य दो शेयर विनिमय संस्थाए है, एक है नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) व दूसरा है बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE). इन्ही दो एक्सचेंजो में सर्वाधिक शेयर व्यपार होता है | बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज १८७५ में शुरू हुआ था तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की खोज १९९२ में की गयी थी और उसमे व्यापर १९९४ में प्रराम्भित हुआ था |
BSE और NSE दोनों अलग एक्सचेंजेस है मगर दोनों का कम करने का तरीका, मार्केट अवधि और समजोता पद्धति, इत्यादी एक ही तरह की है | BSE  में लगभग ४७०० कंपनिया सूचीबद्ध है तो उसका प्रतिद्वंद्वी NSE में लगभग १२०० कंपनिया मै व्यापार होता है | BSE की मुख्य ५०० कंपनियो में मार्केट का लगभग ९०% पूंजीकरण शामिल है तो बाकि १०% शेयर कम अदयातन मात्रा ( वॉल्यूम) से ट्रेड होते है |
How stock exchange works

शेयर बाज़ारो की कार्यप्रणाली

शेयर बाज़ार में कंपनिया अपने शेयर बेच कर अपना व्यापार बढ़ाने वा आगे ले जाने के लिए पूंजी इकठ्ठी करने का काम करतीं है | अधिकतम कंपनिया यही रास्ता चुनती है औए उनके शेयर प्राथमिक सार्वजानिक प्रस्ताव (IPO ) के द्वारा बाज़ार में सामान्य जनता को बेचती है व उनसे पूंजी एकत्रित करती है | कर्ज लेकर उसपे अधिक ब्याज देने के बजाय कंपनिया के लिए आईपीओ का रास्ता सीधा और सरल होता है | कभी कभी अपना कर्ज कम करने के लिए भी कंपनिया आईपीओ या FPO ( अनुगामी सार्वजनिक प्रस्ताव ) बाजारों में लाती है | जो लोग कम्पनीयों के शेयर खरीदते है वो उस कंपनीके हिस्सेदार बन जाते है | अगर कम्पनी लाभ करती है तो उन्हें लाभांश भी मिलता है व उसके वजह से उनके शेयर के भाव भी बढ़ता है |
एक बार कंपनी लिस्ट हो जाती है तो उसके शेयर्स में व्यपार प्रारभित हो जाता है | मार्केट खुलने और बंद होने के बिच में आप जाहे जितनी बार उसमे खरीद वा बिक्री कर सकते है | मार्केट में व्यापार के लिए ख़रीददार और विक्रेता दो नो की जरुरत होती है | दोनों में जो सहमती से व्यापार होता है उसे “सौदा” कहते है | मार्केट में सौदे लगातर मांग और आपूर्ति के वजह से, मार्केट समाचार और मार्केट की मनोदशा की वजह से अलग अलग भाव पे होते है, उसी वजह से हम शेयर के भावो में चढ़ और उतार महसूस करते है |
शेयर बाज़ार दिन ब दिन आत्याधिक जटिल बनते जा रहे है मगर उनमे व्यापार करना उतनाही सरल होते जा रहा है | सरल शब्दों में शेयर बाज़ार में कंपनी के शेयर्स की खरीद- बिक्री होती है |
History of stock exchange in India

भारतीय शेयर बाज़ार का इतिहास

भारत में प्रथम संघटित शेयर बाज़ार सन १८७५ में मुंबई में शुरू हुआ था जो की एशिया का सबसे पुराना शेयर बाज़ार है | १८९४ में अहमदाबाद मे कपडा मिलो के शेयर ट्रेडिंग के लिए विनिमय केंद शुरू किया गया | १९०८ में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज जुट व संबंधित व्यापार के लिए शुरू किया | मद्रास स्टॉक एक्सचेंज १९२० में स्तापित किया गया | भारत में लगभग २४ स्टॉक एक्सचेंज थे उसमे से २१ क्षेत्रीय व्पापार बढ़ाने के लिए शुरू किये गए | सुधार प्रणाली द्वारा २ मुख्य एक्सचेंज अस्तित्व में आये वो थे नॅशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और ओवर द काउंटर एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (OICEI) जिनमे राष्ट्रव्यापी व्यापार होता है |
स्टॉक एक्सचेंज मुख्यतः गवर्निंग बोर्ड व कार्यकारी मुख्यो द्वारा चलाये व शासित किये जाते है | वित् मंत्रालय उन्हें अधिनियमित और नियंत्रित करता है | सरकार ने अप्रैल १९८८ में सेबी की स्थापना की जो एक मार्केट रेगुलेटर है व शेयर व्यापार उद्योग को अधिनियमित व विकसित करने का भी काम करता है |
Stock market history

शेयर बाजारों का वैश्विक इतिहास

१२वी शताब्दी में फ्रांस में राजाओं के वफादार व्यक्ति कृषि समुदायों के कर्ज का प्रबंधन व नियमन करते थे | यही व्यक्ति कर्ज का व्यापार स्वरुप लेनदेन की करते थे तो इस प्रकार वे दुनिया के प्रथम दलाल कहलाते हे |
एक आख्यायिका ये भी के बेल्जियम के ब्रुज शहर में कमोडिटी व्यापारी इक व्यक्ति जिसका नाम वैन डे बुर्जे था उसके घर में मीटिंग के लिए इकठा होते थे जो जगह १४०९ में “बुर्जे बौर्से “ के नामसे जानी गयी | उसके बाद इसी तरह की मीटिंग बेल्जियम के अन्तवेर्प शहर में हुई जहा उस वक्त के सबसे ज्यादा व्यापारी रहा करते थे और वो जगह कमोडिटी व्यापार करने की जगह बन गयी | यह खबर आसपास के शहरों व राज्यों में फ़ैल गयी व इसी तरह बेउर्जें की स्थापना हुई |
13 वी शताब्दी में वैटिकन बैंकर्स सरकारी सिक्योरिटीज में व्यापार करते थे | १३५१ में सरकार ने सरकारी फंड्स की कीमतों को गिरनेवाली अफवाहों को गैर क़ानूनी घोषित किया | १४ वी शताब्दी में पिसा, जेनोआ, वेरोना और फ्लोरेंस के बैंकर्स ने सरकारी सिक्योरिटीज में ट्रेडिंग सुरु की | ये इस लिए संभव हो पाया क्योकि यह शहर और राज्यो पर राजा का प्रभाव नहीं था, इन्हे जनपरिषद चलते थे | मार्केट में शेयर उतारने वाली सबसी पहेली कंपनिया इटालियन थी | यही परमपरा इंग्लैंड और बाकि देशो में १६ वी सदी तक फ़ैल चुकी थी |
१६०२ में डच ईस्ट इंडिया कंपनी पहेली जॉइंट स्टॉक कंपनी थी जिसने फिक्स कैपिटल शेयर दिए थे उसी वजह से इन शेयर्स में अलग अलग एक्सचेंजों में ट्रेडिंग मुमकिन थी | इसके तुरंत बाद एम्स्टर्डम एक्सचेंज में आप्शन और डेरिवेटिव्स की ट्रेडिंग की सुरुवात हुई | डच ट्रेडर्स ही थे जिन्होंने “ शोर्ट सेलिंग” की इजाद की थी जिसे बाद में १६१० में प्रतिबंधित घोषित कर दिया था | अब दुनिया हर एक विकसित और विकसनशील देशों वास्तव में शेयर मर्केट्स है | दुनिया के सबसे बड़े मार्केट में अमिरीकी शेयर बाज़ार, UK का शेयर बाज़ार, जापान, भारत , चीन , कनाडा और जर्मनी के शेयर बाज़ार शामिल है |
History of the American stock market

अमिरीकी शेयर बाज़ार का इतिहास

अमेरिकन स्टॉक एक्सचेंज ( AMEX ) की शुरुवात सन १८०० में हुई थी | १९२१ थक इस एक्सचेंज को “कर्ब एक्सचेंज” से नाम से भी जाना जाता रहा है | इसका अधिकारिक निर्माण समय १९२१ ही पकड़ा जाता है क्योकि इसी साल इसका स्थान्तरण ट्रिनिटी चर्च के करीब नए आवास में हुआ था | मगर ये आधिकारिक तरह अमिरीकी शेयर बाज़ार १९५३ में ही घोषित हुआ | नोव्हेंबर १९९८ में इस एक्सचेंज का विलय नेशनल एसोसिएशन ऑफ़ सिक्योरिटीज डीलर्स से होकर “नैस्डेक-एमेक्स एक्सचेंज” की सुरुवात हुई |
ऑक्टोबर २००८ में अमिरीकी स्टॉक एक्सचेंज का अधिग्रहण NYSE euronext ने किया | तब से धीरे धीरे एमेक्स का कम और डाटा सब NYSE में परिवर्तित किया गया और एमेक्स को बंद कर दिया गया | जनवरी २००९ से इस एक्सचेंज का अधीकारिक नामकरण NYSE amex हो गया |

ट्रेंड को बनाये अपना मित्र

ट्रेडिंग में ट्रेंड को फ्रेंड बनाये

आप किसी चार्ट के गौर से देखेगे तो आपको उस पर कीमते चोटियों और गर्तो में चलायमान दिखेगी | ये संरचना लाइन चार्ट में स्पष्ट रूप से दिखाई देते है | ये कीमतों की उर्ध्वगति और अधोगति के वजह से रेखांकित होती है | कीमतें ज्यादातर समय ट्रेंड या प्रवृति के साथ चलती है और कभी कभी ये ट्रेंड्स लम्बे समयतक टिकते है |

ट्रेंड को समज़िये

ट्रेंड को समज़िये

ट्रेंड उसकी दिशा और पक्षपात अनुसार ३ होते है | एक है अपट्रेंड जिसमे मार्केट में मांग होने की वजह से कीमतों में उछाल देखा जाता है | उसके बाद में आता है डाउन ट्रेंड जिसमे मार्केट में लगातार आपूर्ति की वजह से कीमतों में गिरावट आती है | कभी कभी कीमतें में मांग की कमी की वजह से भी दबाव रहता है | ट्रेंड का तीसरा प्रकार है , साइड ट्रेंड जिसमे कीमतें एक निर्धारित सीमा के अन्दर कैद होके उपर-निचे होती रहती है | जब मार्केट का मुख्य हिस्सा दुविधा में फ़स जाता है तो यह ट्रेंड का प्रकार चार्ट पर नजर आता है | यही सभी ट्रेंड्स आप एक ही चार्ट में चार्ट की समय सीमा बदल कर देख सकते है |

मासिक या साप्ताहिक चार्ट के ट्रेंडस को मुख्य ट्रेंड्स कहा जाता है | दैनिक चार्ट या फिर इंट्रा डे चार्ट के ट्रेंड दुय्यम स्वरुप के होते है | दुय्यम स्वरुप के ट्रेंड लघु अवधि के ट्रेडर्स या इंट्रा डे ट्रेडर्स के उपयोगी होते है तो मुख्य ट्रेंड निवेशको के लिए महत्वपूर्ण होते है |

ट्रेंड का उपयोग

ट्रेंड का उपयोग

ट्रेंड को पहचानना और उस दिशा में ट्रेड करना ही उचित और फायदेमंद होते है | इसी वजह से ट्रेंड को ट्रेडर्स का मित्र कहा जाता है | जो ट्रेडर्स ट्रेंड के साथ कम करते है वो अन्य ट्रेडर्स के मुकाबले ज्यादा मोटा मुनाफा कमाते है और अच्छी तरह से ट्रेडिंग कर पातें है | अननुभवी ट्रेडर्स ज्यादातर ट्रेंड के विरुद्ध जाते है और ट्रेडिंग में नुकसान करते रहते है | अनुभवहीन ट्रेडर्स साइड वेज़ ट्रेंड में फसकर अपने समय का नुकसान करते है |

नए ट्रेडर्स का दृष्टिकोण हमेशा कम से कम नुकसान का होना चाहिए न की मोटा मुनाफ कमाने वाला क्योकि उनसे अनुभवहीनता के कारण उनसे गलतिया ज्यादा होती है | मार्केट में गलती का मतलब नुकसान ही होता है | ट्रेडर्स के ट्रेडिंग का दृष्टिकोण हमेशा जोखिम-लाभ के मद्दे नजर होना चाहिए ना की मूल्याकन स्वरुप निवेश जो एक गलती है और सामान्यत हर एक ट्रेडर अपने ट्रेडिंग जीवन में यह गलती कभी न कभी करता ही है |

टेक्निकल ट्रेडिंग में अच्छी जोखिम लाभ योजना वाली रणनीति से काम करना होता है जो उसे समय के आगे वाला मुनाफा करवाए और मार्केट को पछाड़े | हर एक ट्रेडर अनोखा होता है क्योकि हर एक की ट्रेडिंग योजना अलग होती है, उसका जोखिम लाभ का अनुपात अद्वितीय होता है |

सफल ट्रेडर

सफल ट्रेडर

एक सफल ट्रेडर्स का ट्रेडिंग मंत्र होता है अनुशाशीत ट्रेडिंग और ट्रेंड की दिशा में ट्रेड करना | इसी लिए सफल ट्रेडर्स ज्यादातर मुनाफा कमाता है और बाकी नुकसान से परेशान रहते है | एक या दो बार कोई भी ट्रेडर सौभाग्यशाली हो सकता है मगर अगर आपको लगातार मुनाफा कमाना है तो आपको ट्रेंड का अनुसरण करने वाला ट्रेडिंग प्लान और कम जोखिम-लाभ रणनिति अपनानि ही होगी |

व्यावासिक ट्रेडर्स का एक पसंदीदा मुहावरा है की “ नुकसान से निकल जाओ और मुनाफे पे बैठो” | यह समज और अनुशासनता अनुभव से ही अवगत होती है और सामान्य ट्रेडर और सफल ट्रेडर के बिच में अंतर बनाये रखती है |

कामयाब निवेशक के लिए टाइमिंग ही सबकुछ होता है | इसी लिए सफल निवेशक हमेशा सस्ते में खरीदना और महंगा बेचना पसंद करते है | व्यावसायिक निवेशक हमेशा अपट्रेंड में खरीदते है और डाउन ट्रेंड में मुनाफा वसूलते रहते है जिससे उनके पूंजी में लगातार वृद्धि होती रहती है |

multi timeframe trend

Trend is varied and supple concept and can be defined according to traders need. Trend can be defined as price movement as indicators identifies. But everyone can define trend according to their need, logic and what works for them. When prices start moving towards desired direction with momentum then we call it as prices are “trending”.

Trend characteristics

Trend characteristics

Each and every financial instruments has its own trending characteristics. Some financial instruments trend more than other while some are so sloppy they can’t be traded on technical decisions. Volatility and market interest are also practical factors for this phenomenon. While some financial instruments trend last for loner period than expected while some moves with short lived trends. This is visible on technical charts that why before deciding to trade in stocks, a traders must see its technical charts and trend other you will stuck with dead investment.

Same Stock trend can be variable according to different traders as I already told you, trend can be defined according to ones need. That why you will get different answers for same price chart.

In my experience, currency and commodities are most trending instruments while stock as compared to them gives more sloppy moves. Because currency and commodity are directly linked to economies while stocks are not that much. A Traders have to spend their time with chart and security before start of trading in them to get the idea of how it moves when it in trend or how much time it spend in trend and consolidation.

identify trends

Identify trends

No financial instruments can trend all the time. Even best trending financial instruments spend some time in sideways, which is also a trend. Sideways trend can be called as consolidations.

Consolidation means when prices are not moving much or they are more like trending in straight line. This situation is untradeable but it is a part of is always upcoming uptrend or downtrend. So expert use them to enter long or short before everyone else.

You can identify direction bias using time frame tool. If commodity consolidating on daily chart then zoom out to weekly chart and see it part of uptrend or downtrend.

When prices start crossing moving averages on upper side then traders can say it is trending in uptrend and vice versa.

Trend and timeframes

Trend and timeframes

Chart timeframes also can change trend perspective. Stock trending on daily chart can be in downtrend on monthly chart. Primary trend always influence underlying secondary trend. That why if we analyses well then entry or exit will be perfect with controlled risk.

That why choosing right time frame also necessary to analyze trend and to trade with trend. If short term traders take long or short position based on hourly or weekly chart then expect more chances of trade going wrong. Same can be true for investors if it uses daily chart to take long term investment decisions. That why you cannot say specific about trends without mentioning its timeframe. That will be totally wrong in technical sense.

These are complication of market because market is dynamic entity and continuously changing.

So next time when mentioning trend then never forgot to add timeframe to its details.

Technical trading journey

In market, prices and trend are most important factors, and you must have ability to analyze them and to identify them to make profit out of it. Technical analysis study will definitely going to help with that.

trends on charts

trends on charts

When you learn technical analysis efficiently then you can see trends on charts. If you are new comer in market then first leans about price charts. There are various charting techniques but most common are candlestick, bar and line chart. Most professional use candlestick technique to understand prices better and to analyze price patterns.

Bar charting style is the same but it is old school technique and quite few professional traders uses it. Line charts are simple charting style and you might have seen many times your TV screens on business channels.

Analysis colorful stock chart on monitor

Technical trading job

In technical trading, your job is to identify trend, go with them and pull some money from the market. In down trending chart, wait for reversal signal to buy. Buying at key reversal point is best entry and makes efficient profit for traders and also gives leverage of risk.

It looks easy while speaking but not so easy in practical trading life. It requires lot of past experience. That why most amateurs fails or get losses while professional make money out of them. That why fresher’s must start with paper trading or with investing.

Technical trading summary

Technical trading summary

Chart is working area for technical traders. Over the years many technical analyst and traders made numerous charting styles and indicators based on price and volumes which is graphical representation of market mathematics.

In old days, chartist tend to draw prices of individual stocks on graph papers and then have to analyze them. This was bit time consuming and tedious job but now with the help of technology, this can be done in minutes.

So to start a technical trading journey, traders must have a personal computer or laptop with internet connection and a good charting platform or software with this combine knowledge of technical analysis to trade in market.

टेक्निकल एनालिसिस के साथ ट्रेडिंग की यात्रा

बाज़ार में कीमत और उनकी दिशा ये दोनों चीजे बहुत महत्वपूर्ण होती है | एक ट्रेडर का काम उनको देखना, उन्हें पहचानना और इसकी मदत से मुनाफा कमाना यही होना चाहिए | टेक्निकल एनालिसिस का ज्ञान एक ट्रेडर की हमेशा मदत ही करता है |

टेक्निकल एनालिसिस के साथ ट्रेडिंग की यात्रा

चार्ट और ट्रेंड्स

अगर आप टेक्निकल एनालिसिस को सिखा है तो आप औरो के मुकाबले चार्ट पर ट्रेंड आसानी से ढूंड सकते हो औए पहचान सकते हो | अगर आप मार्केट में नए हो तो आपको पहले कीमतों का चार्तोके बारे में सिखाना चाहिए | चार्टो की कीमत चित्रकारिता नुसार विविध प्रकार है मगर कैंडलस्टिक , बार और लाइन चार्ट के प्रकार सामान्य रूप से उपयोग में लाये जाते है | व्यवसायिक ट्रेडर्स कैंडल स्टिक चार्ट का ज्यादातर उपयोग करते है और उसकी मदत से मुनाफेवाले कीमतों के पैटर्न आसानी से ढूंडे जा सकते है |

 

बार चार्ट भी कैंडल स्टिक चार्ट की तरह ही होता है मगर ये चार्ट आलेखन करने की पद्धति बहुत पुरानी है और आज कुछ गिने चुने ट्रेडर्स ही उनका उपयोग करते है | लाइन चार्ट सबसे सामान्य चार्टिंग पद्धति है और आपने कही बार आपके टीवी स्र्क्रीन पे या एक्सचेंज के वेबसाइट पर यह चार्ट देखे होंगे |

चार्ट और ट्रेंड्स

टेक्निकल ट्रेडिंग में काम

टेक्निकल ट्रेडिंग में एक ट्रेडर उदेश्य हमेशा ट्रेंड को पहचानना , ट्रेंड के साथ ट्रेड करना और बाज़ार में से मुनाफे को घर लाना यही होता है | डाउन ट्रेंड वाले चार्ट पर ट्रेडर्स को दिशा बदल के संकेतो के लिए प्रतीक्षा करनी होती है और वो दिखाते ही ट्रेडर्स को ख़रीददार होना होता है | ट्रेंड का बदलाव ये एक बहुत महत्त्वपूर्ण और मुख्य घटना होती है , और इसे भुनाना ट्रेडर्स के लिए जरुरी होता है | इसी कौशल पर ट्रेडर्स को भविष्य में कितना मुनाफा और कितना घाटा होना है यह भी निर्भर होता है |

 

यह सुनाने में आसान लगता है पर व्यावारिक ट्रेडिंग जीवन में यह काम बहुत मुश्किल होता है | इसके लिए ट्रेडर्स को अनुभव और गंभीर ज्ञान की जरुरत होती है | इसी वजह से अनुभवहीन ट्रेडर्स ज्यतातर असफल होते रहते है और व्यावासिक मुनाफा भुनाते रहते है | इसी वजह से ट्रेडर्स को ट्रेडिंग जीवन की सुरुवात अच्छे मार्केट ज्ञान के साथ पेपर ट्रेडिंग या फिर निवेश के साथ करनी चाहिए |

 

टेक्निकल ट्रेडिंग का सारांश

टेक्निकल ट्रेडिंग का सारांश

चार्ट ये टेक्निकल ट्रेडर का प्ले ग्राउंड होता है | सालो की मेहनत और अनुभव से कुछ बुद्धिजीवी ट्रेडर्स ने चार्ट्स के प्रकार और इंडीकेटर्स का इजाद किया है | जो मार्केट गणित का चित्र स्वरुप रेखांकन होता है जो सामान्य मानवी को समज़ने के लिए आसान होता है |

 

पुराने दिनों में एक चार्टिस्ट को अपने चार्ट खुद हाथ से ग्राफ पेपर पर बनाने पड़ते थे और उसके बाद उनका उपयोग करना पड़ता था , जो थकाऊ और ग़ैरदिलचस्प था | मगर डिजिटल युग की मदत से ये कम अब कंप्यूटर की सहयता से मिनटों में हो जाता है |

 

इसी लिए एक ट्रेडर्स के पास हमेशा एक अच्छा व्यक्तिगत कंप्यूटर और इंटरनेट उपलब्ध होना चाहिए | बहोत सारे चार्टिंग प्लेटफॉर्म्स मुफ्त में उपलब्ध है, जो एक सुरुवाती ट्रेडर्स आसानी से उपयोग में ला सकता है | इसके साथ आप अगर अच्छे से टेक्निकल अनाल्सिस का ज्ञान प्राप्त करते हो तो आपको एक यशस्वी ट्रेडर्स होने से आपको कोई नहीं रोक सकता |